स्थायित्व की मांग को लेकर महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

रतलाम। जिले के महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों ने अपनी वर्षों पुरानी मांगों एवं स्थायित्व संबंधी समस्याओं को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन केबिनेट मंत्री श्री चैतन्य काश्यप, सूक्ष्म एवं लघु उद्योग विभाग, के माध्यम से प्रेषित किया गया।
ज्ञापन में अतिथि विद्वानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे वर्षों से महाविद्यालयों में निरंतर शिक्षण कार्य कर रहे हैं और हजारों विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद आज तक उनके लिए कोई स्थायी नीति लागू नहीं हो सकी है। लंबे समय से सेवा देने के बाद भी वे अस्थायी एवं मानदेय आधारित व्यवस्था में कार्य करने को विवश हैं, जिससे उनके भविष्य को लेकर निरंतर असुरक्षा बनी रहती है।
अतिथि विद्वानों ने कहा कि एक ओर वे शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी मूलभूत सुविधाएं भी प्राप्त नहीं हैं। विशेष रूप से महिला अतिथि विद्वानों को चाइल्ड केयर लीव जैसी आवश्यक सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है। इसके अतिरिक्त विशेष आकस्मिक अवकाश, पितृत्व अवकाश तथा अन्य सामाजिक और पारिवारिक आवश्यकताओं से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं, जिससे उन्हें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि अतिथि विद्वानों ने शिक्षा व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में हमेशा अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने विद्यार्थियों के हित को सर्वोपरि रखते हुए अपनी सेवाएं निरंतर जारी रखीं। इसके बावजूद आज भी उनका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है, जो मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से चिंता का विषय है।
अतिथि विद्वानों ने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा मानवीय आधार पर पाती एवं तदर्थ प्राध्यापकों को स्थायित्व प्रदान किया गया था। इसी प्रकार हरियाणा की भाजपा सरकार द्वारा भी अतिथि विद्वानों को सामाजिक सुरक्षा एवं स्थायित्व प्रदान करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए गए हैं। अतः मध्यप्रदेश सरकार से भी अपेक्षा की जा रही है कि वह शिक्षा क्षेत्र में वर्षों से कार्यरत अतिथि विद्वानों के हित में संवेदनशील निर्णय लेते हुए स्थायित्व नीति लागू करे।
अतिथि विद्वानों ने मुख्यमंत्री से मांग की कि उनके लंबे अनुभव, सेवा अवधि और शिक्षा के क्षेत्र में दिए जा रहे योगदान को ध्यान में रखते हुए शीघ्र स्थायित्व नीति लागू की जाए। साथ ही नियमित रोजगार, सेवा सुरक्षा, सम्मानजनक कार्य वातावरण एवं आवश्यक अवकाश सुविधाएं प्रदान कर उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाए।
अंत में अतिथि विद्वानों ने आशा व्यक्त की कि सरकार उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी, ताकि वर्षों से शिक्षा सेवा में लगे हजारों अतिथि विद्वानों को सम्मान और सुरक्षा के साथ कार्य करने का अवसर मिल सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Play sound