केंद्र सरकार की मिलीभगत का आरोप, फैसले पर पुनर्विचार की मांग

इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । भोजशाला के संबंध में आए हालिया फैसले से भारत वर्षीय सकल जैन समाज में गहरा रोष एवं आहत की भावना व्याप्त है। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू, मयंक जैन एवं वरिष्ठ समाजसेवी सलेकचंद जैन ने एवं समाजजन ने इस फैसले में जैन प्रतिमाओं को हिंदू मंदिर का हिस्सा बताया जाना तथ्यात्मक रूप से गलत एवं आपत्तिजनक है।
श्री दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद के अध्यक्ष आनंद जैन गोधा, हर्ष जैन, सुशील पांड्या नवीन जैन गोधा, डॉ जैनेन्द्र जैन टीके वेद हंसमुख गांधी पदाधिकारियों ने कहा कि भोजशाला परिसर में प्राप्त प्राचीन जैन प्रतिमाएं, शिलालेख एवं अवशेष स्पष्ट रूप से जैन इतिहास एवं धर्म से संबंधित हैं। इन पुरातात्विक प्रमाणों की अनदेखी कर इन्हें हिंदू मंदिर से जोड़ना और जैन धर्म संस्कृति के बारे में गलत दलिल पेश करने से सकल जैन समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला फेसला है।
समाज के वरिष्ठ समाजसेवी संलेकचद, डॉ जैनेन्द्र जैन सुभाष जैन काला एवं समाज के वरिष्ठजनों ने आरोप लगाया कि यह फैसला केंद्र सरकार की मिलीभगत एवं दबाव से दिया गया प्रतीत होता है। ऐतिहासिक तथ्यों एवं पुरातत्व विभाग के पूर्व के प्रतिवेदनों को जिस तरीके से नजरअंदाज किया गया है। मंयक जैन ने कहा कि तीर्थंकर प्रतिमाओं की स्वतंत्र पहचान को नकारा जाना जैन समाज स्वीकार नहीं कर सकता। दद्दू ने सकल जैन समाज की और से मांग करते हुए कहा कि
फैसले पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए।
पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति से पुनः जांच कराई जाए।
जैन प्रतिमाओं एवं शिलालेखों का वैज्ञानिक अध्ययन कर उनकी वास्तविक पहचान सार्वजनिक की जाए।
जैन समाज के पक्षविधिवत सुना जाए और जैन समाज द्वारा दिए गए सभी प्रमाणों पर विचार हो।
राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ,सकल दिगंबर जैन समाज, भारत श्री दिगंबर जैन समाज सामाजिक संसद, इंदौर एवं विश्व जैन संगठन एवं समाजजनों ने चेतावनी दी है कि यदि जैन धर्म की अस्मिता से खिलवाड़ किया गया तो समाज लोकतांत्रिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन करने को बाध्य होगा। इस संबंध में शीघ्र ही राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं पुरातत्व विभाग को ज्ञापन सौंपा जाएगा।