- गुरुदेव मोहन मुनि के जीवन पर बोलना सूर्य को रोशनी दिखाने के समान: डॉ. कुमुदलता म.सा.
- समाजश्रेष्ठी महेंद्र बोथरा को श्रीसंघ ने “संघ गौरव” की उपाधि से किया अलंकृत



रतलाम 27 मई। जैन दिवाकर स्मारक पर पूज्य गुरुदेव, घोर तपस्वी श्रमण संघीय महामंत्री मोहनमुनी जी म.सा. का 19वां पुण्य दिवस अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम जगत वल्लभ जैन दिवाकर प.पू. गुरूदेव श्री चौथमलजी म.सा. एवं आचार्य सम्राट डॉ. शिवमुनिजी म.सा. की आज्ञानुवर्तिनी तथा परम पूज्या कमलावती म.सा. की सुशिष्या, ज्योतिष चंद्रिका शासन प्रभाविका साध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा., डॉ. महाप्रज्ञाजी म.सा., डॉ. पदमकिर्तीजी म.सा. एवं साध्वी राजकिर्तीजी म.सा. आदि ठाणा 4 के पावन सानिध्य में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए ज्योतिष चंद्रिका डॉ. कुमुदलता म.सा. ने कहा, “पूज्य गुरुदेव घोर तपस्वी मोहन मुनि जी म.सा. के विराट जीवन पर बोलना सूर्य को रोशनी दिखाने के समान है। राजस्थान की वीर और महापुरुषों को जन्म देने वाली शाहपुरा की माटी में जन्मे बाबा मोहन को उनके माता-पिता (माँ गुलाब बाई और पिता मांगीलाल जी) ने उनकी भावना के अनुरूप पूज्य गुरुदेव हजारीलाल जी म.सा. को संयम मार्ग हेतु सौंप दिया था।” उन्होंने आगे कहा कि गुरुदेव ने अपनी रसेंद्रिय पर विजय प्राप्त कर चलते-फिरते घोर तपस्या की और चार विघे का त्याग किया। उनके हाथों में अद्भुत लब्धि थी। अपने अंतिम होली चातुर्मास के समय उन्होंने इच्छा व्यक्त की थी कि देवलोकगमन के बाद उनकी समाधि रतलाम की धरा पर बनाई जाए। उनके इसी अंतिम आदेश का पालन करते हुए श्रीसंघ ने उनका अंतिम संस्कार रतलाम में करवाया। डॉ. कुमुदलता म.सा. ने सभी से रतलाम के इस समाधि स्थल को एक पवित्र तीर्थ धाम के रूप में विकसित करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में डॉ. महाप्रज्ञा म.सा. ने सुमधुर गीतिका प्रस्तुत की, जबकि डॉ. पदम कीर्ति म.सा. व साध्वी राज कीर्ति म.सा. ने भी व्याख्यान दिए। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष अजय खिमेसरा ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि रतलाम वासियों का यह सौभाग्य है कि उन्हें गुरु मोहन का आशीर्वाद मिला, जिनकी कृपा दृष्टि से यहां कई संस्थाएं, स्थानक, स्कूल और अस्पताल बने। उन्होंने गुरुदेव की तुलना हनुमान जी से करते हुए कहा कि उन्होंने कभी अपना नाम आगे नहीं बढ़ाया, हमेशा गुरु जैन दिवाकर के नाम को ही सर्वोपरि रखा।
श्रीसंघ मीडिया प्रभारी नीलेश बाफना ने बताया कि संघ हित में सदैव सक्रिय रहने वाले, एकता और समन्वयक की भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ श्रावक महेंद्र जी बोथरा को श्री वर्धमान जैन स्थानकवासी श्रावक संघ नीमचौक द्वारा “संघ गौरव” की उपाधि से अलंकृत किया गया। संघ कोषाध्यक्ष अमृत कटारिया ने अलंकरण पत्र का वाचन किया। सम्मान की इस वेला पर महेंद्र बोथरा ने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, “यह सम्मान मेरा नहीं बल्कि आप सभी का है। मेरे लिए गुरु के सम्मान से बढ़कर संसार में कुछ नहीं है।”
गुणानुवाद सभा से पूर्व पूज्य महासतिया जी द्वारा पंच कलश की स्थापना करवाकर महा मंगलकारी अनुष्ठान संपन्न कराया गया। इसके बाद बहू मंडल और नवयुवक मंडल द्वारा पूज्य गुरुदेव मोहन मुनि जी म.सा. की चादर और चमत्कारी काले डंडे को धर्मसभा के बीच लाया गया, जिसके दर्शन-वंदन कर श्रावक भावविभोर हो गए। वहीं, कु. अक्षरा कटारिया ने ‘रैम्प सांग’ के माध्यम से गुरु महिमा का सुंदर गुणगान किया।प्रबुद्ध जनों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति मे सभा को अखिल भारतीय जैन दिवाकर संगठन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आई.एम. सेठिया, संघ रत्न इंदरमल जैन, नवयुवक मंडल अध्यक्ष आशीष कटारिया और मणिलाल कटारिया ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम मे जैन दिवाकर संघठन समिति महामंत्री राकेश मेहता, संघटन महामंत्री सिद्धांराज संघवी, प्रवक्ता जयंतीलाल डांगी, संतोष चोपडा, लाला जी बम, युवा समिति के कमलेश दुग्गड, महिला समिति की अध्यक्ष संगीता जारोली, शशि मारु, मनीषा रांका, विचार मंच के अभय श्रीमाल, श्री संघ के सुरेश कटारिया, ललित पटवा, प्रेमकुमार जैन मोगरा, विनोद बाफना, संजय पुगलिया, दिलीप मेहता, नवयुवक मंडल महामंत्री वीरेंद्र कटारिया, अरिहंत बोराना, विपिन कटारिया, संजय मेहता, रितेश मूणत, रीना गाँधी, ऋतु कटारिया, समता पितलिया, प्रवीणा भटेवरा, मोनिका मेहता, राखी गाँधी, पिंकी पटवा, ऋतु कटारिया, छाया मुरार, ज्योति मेहता, मीना बोथरा, उषा बोथरा, सुशीला बाफना रक्षिता पटवा, सुहानी पटवा , लक्ष्य कटारिया, श्रेयांस बाफना, शुभ बोराणा आदि के साथ रतलाम जैन श्री संघो के विभिन्न प्रतिनिधि के साथ साथ जिला जेल अधीक्षक लक्ष्मण भदौरिया, अपर कलेक्टर तरुण जैन, एस डी एम पारस जी वैश्य उपस्तिथ थे। कार्यक्रम का आभार श्रीसंघ महामंत्री विनोद कटारिया ने किया।