
इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । तीर्थ स्वरूप दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में तीन दिवसीय प्रवास पर पधारे श्रंमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के कुल गोरव श्रुत संवेगी महाश्रमण आदित्य सागर जी महाराज ने आज अपनी मंगल देशना तीर्थ स्वरूप दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में प्रवचन देते हुए जीवन के उन्नयन की चर्चा करते हुए सही जीवन जीने की कला सिखाई । आपने कहा कि धन कमाने की धुन में लोग 60/ 70 वर्ष तक लगे रहते हैं। धन कमाना जरुरी है लेकिन धर्म करना उससे भी ज्यादा जरूरी है।
मुनिश्री ने आगे कहा कि जो व्यक्ति भोगों में आसक्ति कम कर संकलेष एवं चिंता रहित समर्पण विश्वास और श्रद्धा पूर्वक भगवान की भक्ति करता है वह निरोगी रहकर लंबा जीवन जीता है। भोग वृत्ति एवं संकलेषता रोग उत्पन्न करती है।
आपने निरोगी एवं सार्थक जीवन जीने की चर्चा करते हुए कहा कि जो व्यक्ति सूर्योदय के पूर्व उठता और सूर्यास्त के पूर्व भोजन ग्रहण करता है, खानपान में भक्ष अभक्ष का ध्यान रखता है और भोजन ग्रहण करने के बाद सो कदम चलताऔर वज्रासन में बेठता एवं व्यसन मुक्त एवं तनाव रहित धर्ममय जीवन जीता है उसका जीवन सार्थक जीवन है। प्रवचन के पूर्व मुनि श्री के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर डॉ जैनेंद्र जैन ने प्रकाश डाला।
धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस अवसर पर मुनि श्री अप्रमित सागर जी, मुनि श्री सहज सागर जी एवं क्षुल्लक श्रीश्रेयस सागर जी महाराज भी उपस्थित थे। प्रारंभ में मंगलाचरण श्रीमती सोनाली बगड़िया ने एवं आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी के चित्र का अनावरण एवं चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन जिनालय ट्रस्ट अध्यक्ष भूपेंद्र जैन, संरक्षक प्रकाश चंद जैन, ट्रस्टी निलेश जैन, उज्वल जैन रमेश चंद्र जैन ने किया। मुनि श्री का पाद प्रक्षालन सुलभ, आकांक्षा, माही एवं आरोही छाबड़ा ने किया । मुनि संघ को शास्त्र भेंट श्री शैलेंद्र , अभिषेक, एवं अतिशय सोनी परिवार ने किये। मुनि श्री के समक्ष श्री हंसमुख गांधी, वीरेंद्र जैन देवरी, आलोक जैन, अतुल जैन एवं अजय जैन रेनबो अरविंद अखिलेश सोधीया आदि ने श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया। धर्म सभा का संचालन ट्रस्ट के महामंत्री विपुल बांझल ने किया।