रतलाम में “कविताई” ने बिखेरी शब्दों की शान, गुलाब चक्कर पर सजा साहित्यिक संगम

सभी कवियों को मोमेंटो देकर किया सम्मानित, नवाचार की छाप छोड़ गया आयोजन

रतलाम। शहर की सुहानी शाम शुक्रवार को “कविताई – शब्दों की शान” के नाम रही। गुलाब चक्कर पर आयोजित इस साहित्यिक संगम में नए रचनाकारों ने अपनी भावनाओं, संवेदनाओं और विचारों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शाम 7 से 10 बजे तक चले इस कार्यक्रम में देशभक्ति, मातृ-प्रेम, पिता के संघर्ष और नारी शक्ति जैसे विषयों पर कवियों ने दिल छू लेने वाली प्रस्तुतियां दीं।

कविताओं में ढली भावनाएं
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। जैसे ही “कविताई” का दीप जला, हर दिल भावों से भर चला। मंच से कहीं देशभक्ति का स्वर गूंजा तो कहीं माँ की ममता ने मन छू लिया। पिता के संघर्ष की गाथा ने आँखों में आदर का दीप जला दिया। नारी की महिमा जब मंच पर उतरी, शब्द नहीं मानो शक्ति स्वयं बोल उठी।

इन कवियों ने बांधा समां
“कविताई” के मंच को सुशोभित किया डॉ. खुशबू राठी, डॉ. सुनीता जैन, मदन मस्ताना और राजेंद्र शर्मा ने। सभी रचनाकारों ने अपनी प्रतिभा का स्वर्णिम परिचय देते हुए शब्दों से मन संवारा।

सम्मान और संचालन
कार्यक्रम के अंत में सभी कवियों को स्मृति चिन्ह – मोमेंटो भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन नरेंद्र त्रिवेदी एवं नित्येंद्र एम. आचार्य ने किया। आयोजन संयोजक नित्येंद्र एम. आचार्य रहे। आयोजन में राकेश बोरिया, सुनील निरंजनी, हितेंद्र प्रताप सिंह एवं गणराज भूषण की विशेष भूमिका रही। आयोजकों ने बताया कि गुलाब चक्कर पर यह एक नवाचार था, जिसका उद्देश्य रतलाम के नए रचनाकारों को मंच देना था। “कविताई” केवल आयोजन न था, यह आत्माओं का संगम था। रतलाम की यह शाम लंबे समय तक याद रहेगी।

प्रमुख बिंदु:

  • आयोजन: कविताई – एक साहित्यिक संगम, सफ़र नए रचनाकारों का
  • दिनांक व समय: 29 मई 2026, शाम 7 से 10 बजे
  • स्थान: गुलाब चक्कर, रतलाम
  • कवि: डॉ. खुशबू राठी, डॉ. सुनीता जैन, मदन मस्ताना, राजेंद्र शर्मा
  • संचालन: नरेंद्र त्रिवेदी, नित्येंद्र एम. आचार्य
  • संयोजक: नित्येंद्र एम. आचार्य
  • सहयोग: राकेश बोरिया, सुनील निरंजनी, हितेंद्र प्रताप सिंह, गणराज भूषण
  • विशेष: सभी प्रतिभागी कवियों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया

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