पुरुषोत्तम मास में दिवंगत श्यामसुंदर राठौड़ की पगड़ी रस्म पर 2000 गौमाताओं व 200 वृद्धजनों की सेवा

राठौड़ परिवार ने निभाई अनूठी परंपरा, गौशालाओं में हरा चारा और वृद्धाश्रमों में कराया भोजन

रतलाम। पावन पुरुषोत्तम मास में दिवंगत समाजसेवी स्वर्गीय श्री श्यामसुंदर राठौड़ की पगड़ी रस्म के अवसर पर उनके पुत्र भैरूलाल राठौड़ एवं भारतलाल राठौड़ द्वारा सेवा, संस्कार और जीव-दया का प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर मृत्युभोज की परंपरा से हटकर गौसेवा एवं वृद्धजन सेवा का विशेष आयोजन किया गया, जिसकी नगरभर में सराहना हो रही है।
आयोजन के अंतर्गत रतलाम एवं आसपास की प्रमुख गौशालाओं में लगभग 2000 गौमाताओं को हरा चारा खिलाकर गो-सेवा की गई। इनमें ईसरथुनी स्थित श्री पंचमुखी हनुमान गौशाला, मांगल्य मंदिर जेवीएल स्थित श्री कृष्णा कामधेनु गौशाला, बांगरोद स्थित श्री रामकृष्ण गौशाला तथा सागोद गांव स्थित नगर निगम संचालित गौशाला प्रमुख रूप से शामिल रहीं।
इसी प्रकार नगर के विभिन्न वृद्धाश्रमों एवं सेवा केंद्रों में लगभग 200 वृद्धजनों को भोजन कराया गया। इनमें धोलावाड़ रोड स्थित ईश प्रेम बस्ती, जहां कुष्ठ रोगी परिवार निवास करते हैं, सिलावटों के वास स्थित श्री अन्नपूर्णा वृद्धाश्रम तथा काटजू नगर स्थित निर्मला भवन वृद्धाश्रम प्रमुख रहे।
वाघेला गो सेवा जीव दया समिति के प्रमुख दिनेश वाघेला ने बताया कि समिति का उद्देश्य ऐसे परिवारों को प्रेरित करना है जो धार्मिक, सामाजिक एवं जीव-दया के कार्यों में विश्वास रखते हैं। किसी परिवार में सदस्य के निधन के बाद पगड़ी रस्म अथवा अन्य स्मृति आयोजनों के अवसर पर वृद्धाश्रमों में भोजन, जरूरतमंद परिवारों की सेवा एवं गौशालाओं में गो-भोज जैसी पुण्य गतिविधियां करवाई जाती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई परिवार अपने दिवंगत परिजनों की स्मृति में इस प्रकार के सेवा कार्य करना चाहता है तो समिति के सदस्य संपूर्ण व्यवस्था सेवा भाव से उपलब्ध कराते हैं।
इस अवसर पर उपस्थित जनों ने राठौड़ परिवार की इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सेवा, संवेदना और संस्कारों को नई दिशा प्रदान करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Play sound