पर्यावरण को नष्ट करके हम परमात्मा को प्रसन्न नहीं कर सकते – पूज्य स्वामीजी

-श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव में श्रीराम एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम रहेगी

रतलाम । महामण्डलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वतीजी महाराज ने कहा है हमारा धर्म धरती से जुड़ा है । प्रकृति से ही धर्म पोषित होता है । पृथ्वी, जल, वायु, तेज और अग्नि के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है । पर्यावरण को नष्ट करके हम परमात्मा को प्रसन्न नहीं कर सकते । यदि हम प्रकृति से जुड़े रहे तो वह हमें परमात्मा से जोड़ देगी । विश्व पर्यावरण दिवस पर हम प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए सजग रहने का संकल्प लेवे ।
श्री हरिहर सेवा समिति मोहनलाल भट्ट परिवार एवं श्री कालिका माता सेवा मंडल ट्र्स्ट द्वारा पुरुषोत्तम मास के अवसर पर दयाल वाटिका सैलाना रोड पर श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव के तीसरे दिन स्वामीजी ने पर्यावरण संरक्षण और संवर्धन का संदेश दिया । आरम्भ में आयोजक परिवार के मोहनलाल भट्ट, महेंद्र भट्ट, सुनील भट्ट आदि ने पोथी पूजन किया । भक्त ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने बाल्यकाल से ही अपने बालकों को भक्ति के संस्कार देने का आव्हान किया । शुक्रवार को कथा महोत्सव में धूमधाम से श्रीराम एवं श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जायेगा ।

सनातन धर्म में ही अद्वितीय अवधारणा-
उन्होंने कहा कि यह सनातन धर्म ही है जो प्रकृति को ईश्वर का स्वरूप देखकर उसकी पूजा के माध्यम से उसके संरक्षण और संवर्धन का संदेश देता है । हमने गंगा और गाय में माता के दर्शन किये है तो पीपल और वट आदि वृक्षों को पवित्र मानकर पूजन किया है । भगवान श्रीकृष्ण ने तो पीपल के वृक्ष को विभूति कहा है । तुलसी का हम पूजन और परिक्रमा करते है । यह अद्वितीय अवधारणा केवल हमारे सनातन धर्म और शास्त्रों में ही मिलती है । जिसका हमें गौरव है । न केवल प्रकृति बल्कि समस्त जीव को परमात्मा रूप देखा गया है । तुलसीदास जी ने लिखा है सियाराममय सब जग जानी ।

भगवान को अवतार लेने में देरी नहीं –
पूज्य स्वामीजी ने श्रीमद् भागवत कथा में वर्णित 24 अवतारों के प्रसंग के सन्दर्भ में कहा कि धर्म की आढ़ लेकर धर्म को नुकसान पहुँचाने वाले अधर्मियों से धर्म की रक्षा के लिए ही भगवान समय समय पर विभिन्न अवतार लेते है । अपने स्वार्थ के लिए लोगो की आस्था को तोड़ने वालों और धर्म का तमाशा बनाने वालों को सबक सिखाने के लिए भगवान कभी भी किसी भी रूप में प्रकट हो जाते है । हमारे भगवान द्रोपती की रक्षा के लिए वस्त्र अवतार ले सकते है तो उन्हें मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह और वामन अवतार लेने में कोई भी देरी नहीं होती है । धर्म की संस्थापना और साधु पुरुषों की रक्षा के लिए भगवान अवतार लेकर समाज को असत्य, अन्याय और अत्याचार से सुरक्षित करते है ।
बच्चो को भी मन्दिर साथ लेकर जाएँ-
पूज्य स्वामीजी ने कहा कि बच्चो को धर्म से जोड़ने की जिम्मेदारी परिवार की है । माता पिता, दादा दादी अकेले मन्दिर जाने की अपेक्षा अपने बच्चो को भी साथ लेकर जाएँ । दिनभर की भागमभाग के बीच कम से कम 2 मिनिट तो ऐसे निकालने चाहिए कि जो केवल भगवान के लिए ही हो । उस मस्य आपके और भगवान के बीच कोई नहीं होना चाहिए । भगवान में मन लगाने से संसार के झंझटों से मन ऊपर उठ जायेगा । विश्वास रखिये आपके इतना करने मात्र से धीरे धीरे आचार ,विचार और व्यवहार में सुखद परिवर्तन आएगा ।

भजन से भक्तिरस की वर्षा –
इस अवसर पर आरडीए उपाध्यक्ष प्रवीण सोनी ने स्वामीजी के दर्शन कर आरती में भाग लिया । उनका आयोजन समिति की ओर से अभिनन्दन किया गया । यंहा तुलसी परिवार, सर्वश्री अजित सिंह चुण्डावत, अनिल झालानी, सुरेश गोरेचा, वी.डी.शुक्ला, विशाल राव, प्रशांत व्यास, अखिलेश गुप्ता, सुनील पोरवाल भगत, अविनाश पोरवाल आदि ने स्वागत – वन्दन किया । संचालक सुनील भट्ट ने ‘बड़ी देर भयी नंदलाला’ भजन गाकर सभी को भक्तिरस से सराबोर कर दिया ।

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