शिक्षा एवं संस्कार का माध्यम है विद्यापीठ

श्री महर्षि श्रृंग विद्यापीठ के नवनियुक्त अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी ने पदभार ग्रहण समारोह में कहा

रतलाम 7 जून श्री महर्षि श्रृंग विद्यापीठ 18 वर्षों से निरंतर शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत है । विद्यापीठ में शिक्षा के साथ संस्कार दिए जाते हैं । विद्यापीठ अध्यक्ष कन्हैयालाल तिवारी ने 18 वर्षों तक सेवा कार्य कर समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण दिया है ।
यह विचार श्री सिखवाल समाज देवस्थान न्यास द्वारा संचालित श्री महर्षि श्रृंग विद्यापीठ के नवनियुक्त अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी ने रविवार को श्री गणेश मांगलिक भवन रामगढ़ में आयोजित पदभार ग्रहण एवं स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर अध्यक्ष कन्हैयालाल तिवारी के सम्मान समारोह में व्यक्त किये । उन्होंने कहा कि विद्यापीठ द्वारा शीघ्र ही विद्यार्थियों के लिए श्री महर्षि श्रृंग नगर, टाटानगर, मोहन नगर सिखवाल नगर से आने-जाने के लिए निशुल्क वाहन सुविधा प्रारंभ की जा रही है ।
प्रारंभ में श्री महर्षि श्रृंग के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरुआत हुईl स्वागत उद्बोधन श्री सिखवाल समाज देवस्थान न्यास के महासचिव महेश व्यास ने दिया। समारोह में हाल ही में हरिद्वार में सात दिवसीय भागवत कथा आयोजन करने वाले वरिष्ठ समाजसेवी मांगीलाल जोशी एवं रतलाम विकास प्राधिकरण में सदस्य मनोनीत होने पर धीरज व्यास का भी शाल श्रीफल एवं अभिनंदन पत्र भेंट कर सम्मान किया गया। धीरज व्यास ने प्राधिकरण की योजनाओं की जानकारी देते हुए सम्मान के लिए समाज एव प्राधिकरण में मनोनयन के लिए केबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप को धन्यवाद प्रकट किया । कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ न्यासी अरुण त्रिपाठी ने किया। आभार कोषाध्यक्ष राजकुमार शर्मा ने माना ।

18 वर्ष का कार्यकाल 18 किलो की माला पहनाई
कार्यक्रम में विद्यापीठ के अध्यक्ष पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले कन्हैयालाल तिवारी को 18 किलो फूलों की माला एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया l श्री तिवारी ने कहा सामाजिक कार्य हमेशा जीवन में ऊर्जा का संचार करते हैं । उन्हें 18 वर्षों में अनेक साथियों ने कार्य करने की प्रेरणा दी। विद्यापीठ निरंतर उन्नति करें और सभी का उसमें सहयोग हो यही कामना करता हूं l कार्यक्रम में नवनियुक्त अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी का भी फूलों से स्वागत किया गया ।

यह थे उपस्थित
कार्यक्रम में न्यास अध्यक्ष अशोक पांडया , संस्थापक न्यासी शंकरलाल पांडया, वरिष्ठ न्यासी लेहरुलाल व्यास , रतनलाल व्यास, राधेश्याम नागला, अरुण पुरोहित, प्रहलाद व्यास, गोपालकृष्ण व्यास, समाजसेवी गोकुल जोशी, पृथ्वीराज व्यास, शांतिलाल उपाध्यक्ष, वीरेंद्र त्रिपाठी, राजेश व्यास, चंद्रप्रकाश व्यास, एडवोकेट संतोष त्रिपाठी, दीपक तिवारी, संजय बोहरा आदि उपस्थित थे।

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