
रतलाम 07 जून । श्री गोपाल जी का बडा मंदिर न्यास माणकचौक रतलाम में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर चल रहे शिव महापुराण कथा के अन्तर्गत आचार्य पंडित नंदकिशोर जी व्यास ने कथा का श्रवण कराते हुए कहा कि शिव पुराण में वास्तविक यथार्थ ज्ञान का भंडार है जिसमें धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष, चारो पुरूषार्थो को सिद्ध करने का मार्ग बताया गया है । शिव पुराण के सिद्धांत तत्व का पालन करते हुए प्रत्येक मनुष्य भव बंधन से मुक्त हो सकता है। शिव पुराण में सात सहिताएं है । 24 हजार श्लोकों से परिपूर्ण है । 24 हजार श्लोक अर्थात 24 तत्वों से बना यह मानव शरीर है 25 वां तत्व आत्म स्वरूप स्वंय शिव है। जब निष्काम भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, संयुक्त होकर भगवान शिव का भजन करती है तो मानव शरीर में स्थित 6 चक्रो के साथ सातवां सहस्त्रार चक्र भी जाग्रत हो जाता है। जिसके आत्मा शिव स्वरूप होकर मुक्त हो जाती है। वास्तव में यह सात संहिताएं ही मूलाधार से लेकर सहस्त्रार चक्र मानी गई है । भगवान सदाशिव ही आत्मा को आनंद प्रदान करने के लिए निराकार से साकार स्वरूप धारण करते है। जिसमें सत, रज, तम, तीन गुणों को प्रकृति के माध्यम से धारण कर स्वयं ब्रह्मा,विष्णु, एवं रूद्र उपाधी धारण कर जगत का कल्याण करते है ।
आपने कहा कि पूर्ण रूप से भव सागर अर्थात सांसरिक बंधन से मुक्त होने का एक ही सूत्र है, बहुत पसारा मत करो कर प्रभु की आस, बहुत पसारा जिसने किया वो भी हो गए निराश । इस सूत्र के अनुसार जगत के स्वामी होने पर भी भगवान शिव परिवार सहित तप एवं त्याग करते हुए जगत का योग क्षेम वहन करते है । कथा पश्चात आरती कर प्रसादी वितरण की गई ।
श्री गोपाल जी का बडा मंदिर न्यास माणकचौक रतलाम अध्यक्ष मनोहर पोरवाल , सचिव महेश व्यास ने बताया कि पुरुषोत्तम मास में दिनांक 17 मई 2026 से एक माह तक किये जा रहे धार्मिक आयोजनों में श्रीमती मद् भागवत कथास, शिव महापुराण का आयोजन किया जा रहा है तथा इसके पश्चात श्री राम कथा का आयोजन किया जायेगा । इस तरह पूरे पुरुषोत्तम मास के अंतर्गत धार्मिक आयोजन किये जा रहे है । पंडित नंदकिशोर जी व्यास के मुखारविन्द से शिव महापुराण कथा का रसपान करने हेतु मांगीलाल अग्रवाल, पण्डित मदनलाल शर्मा, जगजीवन राम, जगदीश परिहार, महेश सोनी, मोहनलाल राठौर आदि सहित बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित थे ।