पेंशन वृद्धि विधवा दिव्यांग और वृद्ध महिला पुरुष की सुरक्षा सहारा सम्मान और स्वाभिमान से जीने का अधिकार हे महगाई के जमाने में पेंशन वृद्धि राज्य सरकार का दायित्व है

पेंशन नहीं, सम्मान की मांग है यह— विधवा, दिव्यांग और वृद्धजनों की पेंशन 600 से बढ़ाकर 2000 रुपये करने की उठी जोरदार आवाज

जावरा (अभय सुराणा) । मध्यप्रदेश में विधवा, दिव्यांग एवं वृद्धजन पेंशन को वर्तमान 600 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग अब जनआंदोलन का स्वरूप लेती जा रही है। इस मांग को लेकर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनिल दसेड़ा लगातार जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर उन्हें ज्ञापन सौंप रहे हैं। उनका कहना है कि यह केवल जावरा विधानसभा का मुद्दा नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों विधवा, दिव्यांग और वृद्ध हितग्राहियों के सम्मान, स्वाभिमान और जीवन-यापन से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है।
इसी क्रम में पूर्व में रतलाम विधायक एवं मध्यप्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री चेतन काश्यप, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के चेयरमैन पंकज जोशी तथा भाजपा पिछड़ा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष पवन पाटीदार को ज्ञापन सौंपा जा चुका है। वहीं हाल ही में कालूखेड़ा प्रवास के दौरान जावरा विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे तथा बड़ावदा के हनुमानगढ़ी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान आलोट विधायक डॉ. चिंतामण मालवीय को भी पेंशन वृद्धि की मांग का ज्ञापन दिया गया।
ज्ञापन प्राप्त करने के बाद विधायक डॉ. चिंतामण मालवीय ने इस विषय को पूरी तरह व्यवहारिक और जनहितकारी बताते हुए कहा कि, “मेरी भावना है कि 100 प्रतिशत नहीं, बल्कि 1000 प्रतिशत पेंशन वृद्धि होना चाहिए। यह वास्तविक जरूरत से जुड़ा मुद्दा है और मैं इसे पूरी ताकत के साथ विधानसभा में उठाऊंगा।”
अनिल दसेड़ा ने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में विधवा, दिव्यांग और वृद्धजनों को मात्र 600 रुपये प्रतिमाह पेंशन मिल रही है, जबकि देश के कई राज्यों में यह राशि कहीं अधिक है। पश्चिम बंगाल में 2000 रुपये, उत्तराखंड में 1875 रुपये, महाराष्ट्र में 1500 रुपये, गुजरात एवं राजस्थान में 1200 रुपये, बिहार में 1100 रुपये तथा उत्तरप्रदेश में 1000 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जा रही है। इसके बावजूद मध्यप्रदेश में वर्षों से पेंशन राशि में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के इस दौर में 600 रुपये की राशि से दवा, इलाज, भोजन और दैनिक जरूरतों की पूर्ति करना लगभग असंभव हो गया है। विगत लगभग दस वर्षों से पेंशन राशि में कोई वृद्धि नहीं होने से लाखों हितग्राही आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में पेंशन बढ़ाना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान करना है।
अनिल दसेड़ा ने कहा कि संविधान की भावना के अनुरूप पात्र विधवा, दिव्यांग और वृद्धजनों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार का दायित्व है। समाज का यह वर्ग अपनी आजीविका के लिए काफी हद तक पेंशन पर निर्भर रहता है। ऐसे में सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता राशि को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप बढ़ाया जाना समय की मांग है।
उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा सभी विधायकों से आग्रह किया कि वे इस संवेदनशील विषय को गंभीरता से लेते हुए विधानसभा में पेंशन वृद्धि का मुद्दा उठाएं और इसे शीघ्र लागू कराने का प्रयास करें। उनका कहना है कि विधवा, दिव्यांग और वृद्धजनों की पेंशन में वृद्धि मध्यप्रदेश सरकार के महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के संकल्प को और अधिक मजबूत करेगी तथा लाखों जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी।

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