
रतलाम। जैन समाज एवं रतलाम नगर के लिए अत्यंत हर्ष, गौरव और धर्मप्रभावना का विषय है कि रतलाम के रत्न, त्रिस्तुतिक जैन परंपरा के आचार्यदेव श्री हेमेंद्रसूरिश्वरजी म.सा. के अंतेवासी शिष्यरत्न एवं आचार्यदेव श्री ऋषभचंद्रसूरिश्वरजी म.सा. के समुदायवर्ती, परम पूज्य शासन प्रभावक, सिद्धितप प्रेरक एवं ओजस्वी प्रवचनकार मुनिराज श्री चंद्रयश विजयजी म.सा., मुनिराज श्री जिनभद्र विजयजी म.सा. आदि ठाणा का वर्ष 2026 का चातुर्मास गुरुदेव श्रीमद् राजेंद्रसूरिश्वरजी म.सा. की पावन समाधि स्थली एवं विश्वविख्यात श्री मोहनखेड़ा तीर्थ पर संपन्न होगा।
इस बहुप्रतीक्षित चातुर्मास की मंगलमयी घोषणा कर्नाटक प्रांत के रानीबेनूर में रानीबेनूर श्रीसंघ तथा आदिनाथ राजेंद्र जैन ट्रस्ट मंडल, मोहनखेड़ा तीर्थ के वरिष्ठ ट्रस्टियों एवं गणमान्य श्रावक-श्राविकाओं की गरिमामयी उपस्थिति में की गई। जैसे ही पूज्य मुनिराज की स्वीकृति की घोषणा हुई, उपस्थित गुरु भक्तों एवं ट्रस्टजनों में हर्ष की लहर दौड़ गई तथा पूरा वातावरण गुरुदेव श्रीमद् राजेंद्रसूरिश्वरजी म.सा. एवं आचार्यदेव श्री हेमेंद्रसूरिश्वरजी म.सा. के जयघोषों से गुंजायमान हो उठा।
उल्लेखनीय है कि पूज्य मुनिराज श्री चंद्रयश विजयजी म.सा. विगत दो वर्षों से दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक सहित विभिन्न प्रांतों में निरंतर विचरण करते हुए जैन शासन की प्रभावना, धर्म प्रचार, तप आराधना एवं संस्कार निर्माण के कार्यों में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। उनके प्रभावशाली प्रवचनों एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व से हजारों श्रद्धालु धर्ममार्ग की ओर अग्रसर हो रहे हैं। दक्षिण भारत के अनेक जैन संघों में उनके प्रति विशेष श्रद्धा एवं भक्ति का वातावरण है।
पूज्य मुनिराज के चातुर्मास हेतु चेन्नई, हैदराबाद, बेंगलुरु, रानीबेनूर, यादगिरि सहित दक्षिण भारत के अनेक जैन संघों के साथ-साथ मध्यप्रदेश के इंदौर जैन संघ एवं श्री मोहनखेड़ा तीर्थ द्वारा भी विनम्र निवेदन प्रस्तुत किए गए थे। किन्तु आगामी जनवरी 2027 में युगदृष्टा, राष्ट्रसंत, शासनोद्धारक गुरुदेव श्रीमद् राजेंद्रसूरिश्वरजी म.सा. की 200वीं जन्मशताब्दी वर्ष के ऐतिहासिक आयोजन को दृष्टिगत रखते हुए तथा आदिनाथ राजेंद्र जैन श्वेताम्बर पेढ़ी, मोहनखेड़ा तीर्थ ट्रस्ट मंडल की विशेष आग्रहपूर्ण विनंती को स्वीकार कर पूज्य मुनिराज ने मोहनखेड़ा तीर्थ में चातुर्मास करने की मंगल स्वीकृति प्रदान की।
यह चातुर्मास केवल मोहनखेड़ा तीर्थ ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मालवा, रतलाम एवं जैन समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। गुरुदेव श्रीमद् राजेंद्रसूरिश्वरजी म.सा. की 200वीं जन्मशताब्दी वर्ष के पूर्व आयोजित होने वाला यह चातुर्मास धर्म आराधना, तप, स्वाध्याय, प्रवचन एवं जैन संस्कारों के व्यापक प्रसार का केंद्र बनेगा।
पूज्य मुनिराज श्री चंद्रयश विजयजी म.सा., मुनिराज श्री जिनभद्र विजयजी म.सा. आदि ठाणा का भव्य चातुर्मास प्रवेश आगामी 27 जुलाई 2026, सोमवार, प्रातः 9 बजे मोहनखेड़ा तीर्थ की पावन धरा पर देश के विभिन्न प्रांतों से पधारने वाले जैन संघों, गुरु भक्तों एवं श्रद्धालुओं की विशाल उपस्थिति में संपन्न होगा।
इस ऐतिहासिक घोषणा से रतलाम सहित सम्पूर्ण मालवा अंचल के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह एवं आनंद का वातावरण व्याप्त है।
यह जानकारी रत्नराज मित्र मंडल के अध्यक्ष अजय सिसोदिया एवं सचिव चंदन मादरेचा ने संयुक्त रूप से प्रदान की।