
इंदौर (राजेश जैन दद्दू) । हाल ही में दिल्ली में विराजमान परम पूज्य आचार्य श्री सोरभ सागर जी एवं समाज जनों की उपस्थिति में आपने एक आपत्तिजनक, बेतुका बयान दिया हैं कि “जैन साधु संतों के पिच्छिका उपयोग करने से हर साल 15 लाख मोरों की हत्या की जाती हैं “राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू, एवं समाज के वरिष्ठ समाजसेवी सलेकचंद जैन राकेश जैन,मंयक जैन, डॉ जैनेन्द्र जैन, अमित कासलीवाल हंसमुख गांधी, टीके वेद, एवं फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका श्रीमती पुष्पा कासलीवाल, महिला परिषद् की संभागीय अध्यक्ष श्रीमती मुक्ता जैन, श्रीमती रेखा जैन श्रीफल आदि ने आप के द्वारा दिया उपरोक्त बयान बेबुनियाद, मनगढ़ंत और अप्रमाणिक हैं। और जैन धर्म संस्कृति के बारे में आपकी जानकारी गलत एवं निराधार है डॉ जैनेन्द्र जैन ने कहा कि जैन धर्म, संस्कृति, एवं अहिंसक समाज हैं । दद्दू ने कहा कि आप संयम का उपकरण पिच्छिका की आप बात कर रही हैं वह साधु संत सूक्ष्म जीवों की हिंसा न हो इसलिए इसका उपयोग करते हैं और जो धर्म जियो और जीने दो एवं सूक्ष्म जीवाणुओं की रक्षा का भाव रखता हैं वह कैसे एक पंचेन्द्रीय जीव मोर की हत्या का कारण बन सकता हैं?
मोर स्वयं ही साल में एक बार प्राकृतिक रूप से स्वतं अपने पंखों का त्याग करता हैं और जो पंख मोर स्वयं त्यागता हैं उसकी पूरी डंडी पूर्णतः सफेद होती हैं और जैन साधु संतों के उपयोग में आने वाली मोर पंख की डंडी पूरी तरह से सफेद होती हैं और जिन मोरों को मारकर मोर पंख हासिल किए जाते हैं उनमें खून लगा होने की वजह से उनकी डंडी पिछे से काली पड़ जाती हैं। इतना ज्ञान तो एक सामान्य व्यक्ति को होता हैं।
आपने न सिर्फ जैन समाज बल्कि सनातन धर्म और मुस्लिम धर्म की भावनाओं को आहत किया हैं। जैसा कि आपको ज्ञात होगा मोर पंख का प्रयोग सनातन धर्म में खाटु श्याम जी और कृष्ण मंदिरों में होता हैं वैसे ही इस्लाम धर्म में मस्जिदों में भी इसका प्रयोग होता हैं।
जब से मोर को राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया हैं,तब से मोरों की संख्या में बढ़ोतरी हुई हैं। इसलिए मोरों को कोई नहीं मारता। विश्व जैन संगठन, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ आप से आग्रह करता है कि आप के व्यक्तव से भारत वर्षीय जैन समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। इसलिए आप जल्द से जल्द क्षमा मांगे। नहीं तो आप के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।