ईटावा माताजी में जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन





रतलाम 30 जून। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर 19 मार्च से प्रारंभ हुए जल गंगा संवर्धन अभियान का समापन आज 30 जून को ईटावा माताजी के मंदिर परिसर में सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान के मुख्य आतिथ्य में हुआ। कलश की पूजा कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद श्रीमती अनिता नागर सिंह चौहान ने कहा कि जल केवल जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि विकास, समृद्धि और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा का भी प्रमुख माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जल स्रोतों से समृद्ध होने के बावजूद बदलते जलवायु चक्र, भूजल के अत्यधिक दोहन और लापरवाही के कारण जल संरक्षण आज सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। उन्होंने बताया कि ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान-2026‘‘ के तहत प्रदेशभर में लगभग 3.62 लाख जल संरक्षण कार्यो का क्रियान्वयन किया गया हैं, जिन पर करीब 10,514 करोड़ रुपये की लागत आई है। सांसद ने बताया कि अभियान के अंतर्गत हजारों खेत तालाबों का निर्माण, कुओं का रिचार्ज, अमृत सरोवर, चेक डेम एवं जलाशयों का जीर्णाेद्धार, नालों की सफाई, वर्षा जल संचयन, जल गुणवत्ता परीक्षण, नदी संरक्षण, वन क्षेत्रों में जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण तथा स्कूलों एवं आंगनवाड़ियों में जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए गए हैं। उन्होंने श्रमदान के माध्यम से तालाबों, कुओं और बावड़ियों की सफाई में योगदान देने वाले लाखों नागरिकों का अभिनंदन करते हुए कहा कि निर्मित जल संरचनाओं को अपनी संपत्ति मानकर उनका नियमित रखरखाव करना, जल का विवेकपूर्ण उपयोग करना तथा पानी की बर्बादी रोकना प्रत्येक नागरिक का सामाजिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि सरकार जल सुरक्षा, सिंचाई विस्तार, नदी पुनर्जीवन और भूजल संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी। सांसद ने बताया कि जुलाई 2026 से विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) की शुरुआत की जाएगी, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही प्रधानमंत्री के आह्वान पर आगामी मानसून में ‘‘एक पेड़ माँ के नाम’’ अभियान के तहत व्यापक वृक्षारोपण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल और वृक्ष एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए प्रत्येक परिवार कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महापौर प्रहलाद पटेल ने कहा कि नगर निगम जल संरक्षण, तालाबों के पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि अमृत सागर तालाब में वेटलैंड परियोजना, हनुमान ताल के सौंदर्यीकरण तथा शहर में वॉटर रिचार्जिंग के कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से वर्षा जल संचयन, अधिक से अधिक पौधारोपण और पानी के दुरुपयोग को रोकने की अपील की। महापौर ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रतिबंधित पॉलिथीन के उपयोग पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता बताते हुए कहा कि जल, हरियाली और स्वच्छता के प्रति जनजागरूकता ही भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है। महापौर श्री प्रहलाद पटेल की उपस्थिति में सभी उपस्थित जनसमुदाय को जल गंगा संवर्धन अभियान की शपथ दिलाकर जल ही जीवन के संदेश को सार्थक करने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष श्री प्रदीप उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश में 19 मार्च से 30 जून तक 100 दिवसीय अभियान के तहत सरकार और जनभागीदारी के सहयोग से नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों के संरक्षण का व्यापक कार्य किया गया। उन्होंने बताया कि रतलाम शहर की सभी बावड़ियों की विशेष सफाई कर उन्हें संरक्षित करने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण तभी सफल होगा जब प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाए। पानी की बर्बादी रोकना और खुले नलों को बंद रखना जैसे छोटे-छोटे प्रयास भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्रीमती मिशा सिंह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की खेती पूरी तरह वर्षा पर निर्भर है। 10, 15 या 25 जुलाई तक होने वाली बारिश के अनुसार किसान फसलों का चयन करते हैं, इसलिए जल संरक्षण और वर्षा जल का समुचित प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नल, बोरवेल और तालाब जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से लोग अक्सर भूल जाते हैं कि जल संसाधन सीमित हैं। यदि आज पानी का संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि पेड़ प्राकृतिक रिचार्ज सिस्टम का कार्य करते हैं। वर्षा का पानी पेड़ों और जंगलों के माध्यम से धीरे-धीरे जमीन में समाकर भूजल स्तर बढ़ाता है। नर्मदा जैसी नदियां भी जंगलों से बूंद-बूंद रिसने वाले जल से ही जीवन पाती हैं। श्रीमती सिंह ने कहा कि ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ का यह चरण भले ही पूर्ण हो रहा हो, लेकिन अब इसका अगला चरण व्यापक वृक्षारोपण का होगा। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर जल संरक्षण को स्थायी बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में सूखे जैसी परिस्थितियों से बचा जा सके।
कार्यक्रम के अंत में जल गंगा संर्वधन अंतर्गत सराहनीय कार्य करने वाले अधिकारी/कर्मचारी एवं आमजन को प्रमाण पत्र वितरित किए गए एवं सभी जनप्रतिनिधियों सहित अधिकारी कर्मचारियों ने पौधारोपण किया। कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष डॉ. फूल सिंह, राकेश पाटीदार, अशोक धाकड़, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती मनीषा शर्मा, जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि विशाल जायसवाल, जनपद सदस्य मंगला कुंवर जीवन सिंह देवड़ा, जिला पंचायत सदस्य नाथू गामड़, सीईओ जिला पंचायत सुश्री वैशाली जैन सहित अधिकारी/कर्मचारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन पंचायत इंस्पेक्टर श्री कमलेश पापरीवाल ने किया एवं आभार जनपद सीईओ छितु सिंह वस्केला ने माना।