अमावस्या के अवसर पर होंगी लोगस्स की महामंगल कारी साधना


रतलाम 13 जुलाई। प्रभु महावीर की अंतिम देशना उत्तराध्ययन सूत्र के गूढ़ रहस्यों को उजागर करते हुए महासती प्रफुल्ला जी मसा ने शांतिनगर में आयोजित धर्म सभा में श्रद्धालुओं को जीवन का मर्म समझाया। उन्होंने कहा कि जो आत्मा जिनेंद्र भगवान के वचनों पर श्रद्धा रखकर उनका अनुसरण करती है, वह मेल, क्लेश और संक्लेश जैसे दुर्गुणों से सदा के लिए मुक्त हो जाती है। महासती जी ने राग, वैराग्य और अनुराग के अंतर को बेहद सरल उदाहरणों से समझाया। उन्होंने कहा, “संसार में राग (मोह) हमेशा क्षणिक होता है। जैसे किराए का मकान खाली करने का नोटिस मिलते ही हमारा उससे मोह भंग हो जाता है, या ट्रेन का सफर खत्म होते ही हम अपनी आरक्षित सीट छोड़ देते हैं, वैसे ही संसार की हर वस्तु के प्रति हमारा राग समय के साथ घटता जाता है। रसगुल्ला या नई पोशाक शुरुआत में प्रिय लगती है, लेकिन बाद में उसके प्रति आकर्षण खत्म हो जाता है।”
उन्होंने आगे कहा कि राग हमेशा घटता है और जीव को नर्क के द्वार तक ले जाता है, जबकि ईश्वर के प्रति ‘अनुराग’ और संसार से ‘वैराग्य’ हमेशा बढ़ता है, जो मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। प्रभु वचनों पर अटूट श्रद्धा रखने वाला ‘सम्यक्तवी’ कहलाता है, जबकि शंकाओं में भटकने वाला ‘मिथ्यात्वी’ रह जाता है।
धर्म सभा को सम्बोधित करते हूए द्विशतावधानी महती श्री म सा ने कहा की अहंकार की तुलना अनुपयोगी फर्नीचर से करते हुए उन्होंने कहा, “जैसे घर में रखा फालतू फर्नीचर जगह घेर लेता है और चलने-फिरने की जगह नहीं बचती, वैसे ही ईगो के कारण मनुष्य का हृदय छोटा हो जाता है, जहाँ अपनों के लिए भी कोई स्थान नहीं बचता।” “आप पालीताणा की 3600 सीढ़ियाँ चढ़ जाएं, तो भी मुक्ति की गारंटी नहीं है। लेकिन यदि आप अपने अहंकार को एक तरफ रखकर अपने किसी दुश्मन के घर की मात्र 5 सीढ़ियाँ चढ़ जाते हैं, तो आपकी मुक्ति की पूरी संभावना बन जाती है। पूज्या श्री ने कहा कि मानव जीवन में ‘मान कषाय’ (अहंकार) सबसे तीव्र होता है। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए कहा कि द्रौपदी के कहे शब्द और दुर्योधन के अहंकार के टकराव के कारण ही इतना बड़ा विनाश हुआ।
शांति नगर श्रीसंघ ने सूचित किया है कि पूज्य महासती जी वर्तमान में शांतिनगर में विराजमान हैं। दिनांक 14 जुलाई, मंगलवार (अमावस्या) को प्रातः 09:00 से 10:00 बजे तक लोगस्स की महा मंगलकारी साधना और विशेष प्रवचन का आयोजन किया जाएगा। शांति नगर श्रीसंघ ने सभी धर्मप्रेमी बंधुओं से अधिक से अधिक संख्या में पधारकर इस अलौकिक धर्मलाभ को लेने का भावभीना निवेदन किया है।