उत्तम वर्षा एवं जनकल्याण की कामना से वैदिक पर्जन्य यज्ञ सम्पन्न

रतलाम। जिले में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसानों, पशुपालकों एवं आमजन की बढ़ती चिंता को ध्यान में रखते हुए स्थानीय मांगल्य मंदिर (जेवीएल मंदिर) परिसर में युवा सेवा संघ, मांगल्य मंदिर धर्मक्षेत्र ट्रस्ट , वैदिक जागृति ज्ञान-विज्ञान पीठ, मानस धाम गुरुकुल, ज्योतिष शिक्षण तथा अखिल भारतीय पुजारी महासंघ (जिला रतलाम) के संयुक्त तत्वावधान में उत्तम वर्षा, समृद्ध कृषि, हरियाली एवं लोककल्याण की मंगलकामना के साथ वैदिक विधानानुसार एक दिवसीय पर्जन्य (वर्षा) यज्ञ सम्पन्न हुआ।
यज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चार एवं दिव्य औषधियों द्वारा आहुतियों के माध्यम से ईश्वर से प्रार्थना की गई कि रतलाम जिले में समय पर पर्याप्त एवं संतुलित वर्षा हो, खेत-खलिहान लहलहाएँ, किसानों की फसल सुरक्षित रहे, जलस्रोत पुनः भरें तथा जन-जन के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली का संचार हो। वर्तमान में जुलाई माह समाप्ति की ओर है, लेकिन जिले में अपेक्षित वर्षा नहीं होने से किसानों के साथ-साथ पूरे समाज में चिंता का वातावरण बना हुआ है। इसी लोकमंगल की भावना से इस विशेष वैदिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया।
यज्ञाचार्य मानस धाम गुरुकुल के संस्थापक आचार्य चेतन शर्मा ने बताया कि भारतीय वैदिक परंपरा में पर्जन्य यज्ञ का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। ऋग्वेद, यजुर्वेद एवं अन्य वैदिक ग्रंथों में प्रकृति के संरक्षण, ऋतुचक्र की संतुलित व्यवस्था तथा समय पर वर्षा के लिए यज्ञ की महिमा का वर्णन मिलता है। यज्ञ में दी जाने वाली औषधीय, सुगंधित एवं प्राकृतिक सामग्री अग्नि के माध्यम से वातावरण में सूक्ष्म रूप में फैलकर पर्यावरण को शुद्ध करती है, सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है तथा प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायक मानी जाती है। वैदिक परंपरा के अनुसार यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और मानव जीवन के मध्य समन्वय स्थापित करने का एक वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक माध्यम भी है।
आचार्य महेशानन्द शास्त्री ने कहा कि यज्ञ का मूल उद्देश्य केवल वर्षा की कामना करना नहीं, बल्कि समस्त सृष्टि के कल्याण, पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन, कृषि समृद्धि और जनमानस में सकारात्मकता का संचार करना भी है। जब समाज सामूहिक रूप से निःस्वार्थ भाव से लोककल्याण की भावना लेकर वैदिक अनुष्ठान करता है, तब सामाजिक एकता, आध्यात्मिक चेतना और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ती है।
आयोजकों ने सभी नागरिकों से वर्षा जल संरक्षण, अधिक से अधिक पौधारोपण तथा पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ प्रकृति के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने का भी आह्वान किया।
यज्ञ में विशेष रूप से महर्षि संजय चैतन्य ब्रह्मचारी ,पं. मनोज मिश्रा ,पं. चेतन शर्मा , पं. राजेश रामशरण पाण्डेय , पं. मुकेश मिश्रा ,पं. सच्चिदानंद पुरोहित , पं. दयाराम , पं. सुदामा मिश्रा , महावीर भाई सहित आचार्य डॉ.पं. महेशानन्द शास्त्री की विशेष उपस्थिति रही ।

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