गौमाता पंचतत्वों का पोषण कर ब्रह्मांड को करती है पवित्र – संत श्री गौ शरणानंद सरस्वती

रतलाम 21 जुलाई । अमर वाटिका, संत रविदास नगर में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय गौ कथा एवं दिव्य दरबार के द्वितीय दिवस पर गौ क्रांतिकारी संत श्री गौशरणानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि गौमाता पंचतत्वों का पोषण करती है और धरती, आकाश, जल, अग्नि एवं वायु को पवित्र करती है। गौमाता विश्व की माता है, संपूर्ण ब्रह्मांड का पालन-पोषण गौमाता से ही होता है।
संत श्री ने कथा में श्रद्धालुओं को बताया कि गौमाता के घृत से हवन किया जाता है। गौमाता के गोबर के कंडों पर लगाई गई आहुतियों से देवगण तृप्त होते हैं। गौमाता के दूध से बनी खीर की आहुति लगाने से पितृगण तृप्त होते हैं।
उन्होंने कहा कि मनुष्य की मुख्य तीन माताएं होती हैं – पहली गौमाता, दूसरी धरतीमाता और तीसरी जन्मदायिनी माता। इन तीनों के प्रति समर्पित रहना ही सच्चा धर्म है। जो व्यक्ति इन माताओं के प्रति ईमानदारी से अपना जीवन समर्पित करता है, उस पर ईश्वर का आशीर्वाद सदैव बना रहता है। माताओं बहनों के निवेदन पर संत श्री ने कथा का समय परिवर्तन कर दोपहर एक बजे से चार बजे तक किया है ताकि वर्षा ऋतु में किसी भी गौ भक्त को आने जाने में कोई परेशानी न हो।

पोथी पूजन एवं आरती
कथा से पूर्व सनातन सोशल ग्रुप के अध्यक्ष अनिल पुरोहित ए पी बुलियन चेतन पटेल एवं सरस्वती पटेल ने विधिवत पोथी पूजन कर संत श्री का अभिनंदन किया और धर्मलाभ प्राप्त किया।
सायंकाल में गौमाता की आरती संपन्न हुई। आरती में पूर्व पार्षद अशोक देवड़ा, राधेश्याम बोदलिया, गोपाल सोलंकी, शांति बाई सांखला, वंदना पुरोहित, पार्षद आयुषी जलज सांखला, धीरज पांड्या, तारा सांखला, तुलसी पटेल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। धर्मसभा का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता अनिल पुरोहित ने किया।

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