
रतलाम, 21 जुलाई। माननीय सिविल सर्जन डॉ. ए.पी. सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 4 जुलाई 2026 को जी.आर.पी. स्टाफ द्वारा रेलवे की एक बोगी में अज्ञात अवस्था में मिली एक नवजात बालिका को जिला चिकित्सालय के एस.एन.सी.यू. (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती कराया गया था। बालिका का नाम अस्थायी रूप से “देवी” रखा गया।
लगभग 14 दिनों तक एस.एन.सी.यू. में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी, समर्पित उपचार और स्नेहपूर्ण देखभाल के बाद नवजात का स्वास्थ्य पूरी तरह संतोषजनक हो गया। इसके पश्चात 20 जुलाई 2026 को सेवा भारती मातृछाया शिशुगृह में प्रवेश हेतु सामाजिक कार्यकर्ता अर्पित गुप्ता व शीतल सोलंकी ( यशोदा) को बालिका विधिवत सुपुर्द की गई।
बालिका की विदाई का क्षण अत्यंत भावुक रहा। वार्ड में उपस्थित प्रत्येक चिकित्सक एवं स्टाफ सदस्य उसे अपनी गोद में लेकर स्नेह लुटाता रहा। एस.एन.सी.यू. के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रतीक आर्य ड्यूटी समाप्त होने के बाद भी केवल उसकी विदाई के लिए रुके रहे। उन्होंने लंबे समय तक उसे अपनी गोद में लेकर दुलार किया। जिला रोगी कल्याण समिति के सदस्य गोविंद काकानी भी भावुक हो उठे और स्वयं नवजात को मातृछाया शिशुगृह तक छोड़ने गए।
समाजसेवी गोविंद काकानी ने बताया कि पूर्व में जब माननीय सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान नवजात का हाल जानने एस.एन.सी.यू. पहुँची थीं, तब उन्हें उपचार की प्रगति से अवगत कराया गया था। अब नवजात को मातृछाया भेजे जाने की जानकारी भी उन्हें दी गई। सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान ने नवजात के स्वास्थ्य एवं समुचित देखभाल के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए थे।
सिविल सर्जन डॉ. ए.पी. सिंह के मार्गदर्शन में डॉ. प्रतीक आर्य एवं एस.एन.सी.यू. की पूरी टीम ने नवजात को केवल चिकित्सकीय उपचार ही नहीं, बल्कि ममता, अपनत्व और मानवीय संवेदनाओं से भी संवारने का कार्य किया। स्वस्थ होने के बाद जब ‘देवी’ को उसके नए आश्रय के लिए विदा किया गया, तब उपस्थित चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों की आंखें नम हो गईं। यह दृश्य चिकित्सा सेवा के साथ मानवीय संवेदनाओं का एक भावपूर्ण उदाहरण बन गया।