जय गुरू सौभाग्य, जय गुरू प्रकाश कीे गूंज के बीच प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी का चातुर्मासिक मंगल प्रवेश

रतलाम23 जुलाई। मालव केसरी, प्रसिद्ध वक्ता, पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य रत्नपुरी रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय का चातुर्मासिक मंगल प्रवेश जय गुरू सौभाग्य, जय गुरू प्रकाश कीे गूंज के बीच हुआ। भक्तांे ने संयम इनका सख्त है, तभी तो इतने भक्त है का नारा लगाकर अपना उत्साह प्रकट किया। किरण टाकीज महालक्ष्मी परिसर से आरंभ हुआ मंगल प्रवेश चल समारोह मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में धर्मसभा के रूप में परिवर्तित हो गया।
प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी मसा के साथ चातुर्मास के लिए उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8, महासती श्री चंदनबालाजी मसा एवं सेवाभावी श्री कल्पनाजी मसा का भी मंगल प्रवेश हुआ। धर्मसभा में नीम चैक स्थानक पर विराजित आयंबिल तप आराधिका महासती श्री प्रफुल्लाजी मसा ठाणा-5 भी मंचासीन रहे। प्रवेश चल समारोह में रतलाम और आसपास के स्थानों के अलावा प्रदेश और देश के कई स्थानों से आए गुरूभक्तों ने प्रवर्तकश्री की अगवानी की। राकेश छाजेड, विनोद झामर, भंवरलाल होरा सहित कई तपस्वियों ने त्याग-तपस्या के प्रत्याख्यान लिए। अमृतलाल गुगलिया ने आयंबिल का प्रत्याख्यान लिया। धर्मसभा में महासतीजी एवं अन्य श्रावक-श्राविकाओं ने स्तवन प्रस्तुत कर प्रवर्तकश्री के प्रति स्वागत भाव प्रकट किया। धर्मसभा का संचालन श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने किया। इस दौरान श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल सहित सकल जैन श्री संघ के प्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।

वे संघ भाग्यशाली, जिन्हे मिला चातुर्मास का लाभ

श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी मसा ने कहा कि संतों का आगमन सुंदर व शुभ होता है। वे सुसंस्कृति से सबके जीवन को सजाते है। चातुर्मास का लाभ जिस संघ को मिलता है, वह भाग्यशाली होता है। क्योंकि इसकी विनती कई संघों की होती है और लाभ एक ही संघ ले पाता है। रतलाम मालव केसरी गुरुदेव श्री सोभाग्यमलजी मसा की धर्म भूमि है, जहां नई उर्जा मिलती है। चातुर्मास में श्रावक-श्राविका अधिक से अधिक तप-त्याग और तपस्या करे, जिससे उनका जीवन भी निर्मल होगा। प्रवर्तकश्री ने आगामी 7 अगस्त को गुरूदेव की पुण्यतिथि से पूर्व 11 उपवास का तपक रने की प्रेरणा भी दी।
महासती प्रफुल्लाश्री जी मसा ने कहा कि रतलाम पुण्यशाली और भाग्यशाली नगरी है, जहाँ महान रत्नों का जन्म हुआ और वे चातुर्मास के लिए आए है। चातुर्मास का हर पल जीवन को निर्मल करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि संतों का मिलना बहुत मुश्किल भी होता है। जन्म-जन्म का पुण्य उदय होता है, तभी प्रवर्तकश्री जैसे संतों का पदार्पण होता है। जहां संत होता, वहाँ बसंत होता है। उपप्रर्वतनी, महासतीश्री सुमनप्रभा जी ने गुरु के चरणों में समर्पण लेकर आने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि पुण्योदय से चातुर्मास मिला है, इसका लाभ अधिक से अधिक उठाए। महासती श्री चंदनबाला जी मसा ने कहा कि संतों का समागम और प्रभु की भक्ति दुर्लभ होती है,जो रतलाम को मिल रही है। चातुर्मास में संतों की वाणी का लाभ ले और सभी जीवन को आनंदमय बनाए। इस मौके पर नागदा श्री संघ द्वारा वर्ष 2027 का चातुर्मास प्रदान करने की विनती की गई।

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