

रतलाम । तुलसी परिवार द्वारा सजन प्रभा सभागार में गुरु पूर्णिमा महोत्सव ब्रह्मर्षि किरीट भाई जी के सानिध्य में मनाया गया। प्रारंभ में दीप प्रज्वलन तुलसी परिवार अध्यक्ष बाबूलाल चौधरी, राजेंद्र व्यास, मोहनलाल भट्ट, लक्ष्मीनारायण धनोतिया, घनश्याम पांचाल, अनिल झालानी, हरीश सुरोलिया ने किया। किरीट भाई जी का स्वागत निर्मला चौधरी, कीर्ति व्यास, सरिता सुरोलिया, प्रीति व्यास, रेखा धनोतिया, मधु गुप्ता, सुलोचना शर्मा, राकेश माली आदि ने किया । उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए ब्रह्म ऋषि किरीट भाई जी ने कहा कि परमात्मा जीव मात्र का कल्याण करते हैं परमात्मा समदर्शी है इसलिए वह किसी से भेदभाव नहीं करते, जन्म मरण जीवन का हिस्सा है किसी महापुरुष ने मृत्यु को मुक्ति कहा है तो किसी ने मोक्ष कहा है परमात्मा ने हर व्यक्ति के हिसाब से उसके जीवन की व्यवस्था पृथ्वी पर की है व्यक्ति को यदि जीवन में आनंद चाहिए तो उसे कला का ज्ञान आवश्यक है । उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि नदी की आवाज में कल कल की ध्वनि इसलिए उत्पन्न होती है कि उसका बहता जल रास्ते में आने वाले पत्थर की शिलाओं से टकराकर कल कल का संगीत पैदा करता है इस प्रकार व्यक्ति की जीवन यात्रा भी तभी संगीतमय होती है जब व्यक्ति के जीवन में कष्ट आते हैं और वह उनसे सफलता पूर्वक पार पा लेता है ।
उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति का अर्थ यह होता है कि व्यक्ति सेवाकाल के पश्चात अपने जीवन का शेष समय अपने स्वयं के ऊपर खर्च करें, उन्होंने कहा कि चाहे कोई भी हो संसारी व्यक्ति हो साधु हो या भगवान हो सभी को जीवन में प्रेम चाहिए किंतु आप किसी से आशा मत रखो नहीं तो आप दुखी हो जाओगे, प्रतीक्षा मत करो उसकी जगह उड़ान भर लो। व्यक्ति का हर दिन एक समान नहीं होता है इसलिए व्यक्ति को किसी से नाराजगी भी नहीं रखनी चाहिए यदि आप नाराज रहेंगे तो आपका ही नुकसान होगा इसलिए मुस्कुराकर जिंदगी बिताना चाहिए ।उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हृदय में शुद्ध व पवित्र रहना चाहिए उसमें राग व द्वेष नहीं होना चाहिए अगर व्यक्ति के हृदय में राग और द्वेष नहीं है तो उसका हृदय शुद्ध हो जाता है। इस अवसर पर प्रसिद्ध भजन गायक पंडित गोपाल शर्मा ने सुमधुर स्वरों में भजन प्रस्तुत किये किरीट भाई जी ने गुरु दीक्षा भी प्रदान की। उक्त जानकारी देते हुए राकेश पोरवाल ने बताया कि अंत में लड्डू गोपाल की आरती कर प्रसादी वितरित की गई। संचालन आशीष दशोत्तर ने किया ।