चातुर्मास संयम साधना और अहिंसा की उपासना का आत्मिक अनुष्ठान है -पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी

इंदौर/दिल्ली (राजेश जैन दद्दू) । श्रमण संस्कृति के महामहिम पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का 37 वां वर्षायोग (चातुर्मास)मंगल कलश स्थापना समारोह मंगलवार को देश के विभिन्न प्रांतो से आए हजारों भक्तों की उपस्थिति एवं सक़ल दिगंबर जैन समाज दिल्ली एनसीआर के तत्वावधान में ऋषभ विहार में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर पट्टाचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने कहा कि चातुर्मास संयम साधना के लिए किया जाने वाला आत्मिक अनुष्ठान है जिसका उद्देश्य अहिंसा की उपासना है। अहिंसा ही परम धर्म है उसकी आराधना से साधक भगवान बनता है। चातुर्मास धर्म साधना और आत्म सिद्धि के लिए है धन संग्रह, बाहरी व्यवस्था और राजनीति के लिए नहीं है। यह श्रावक और श्रमण के मिलन का भी पर्व है जिसे श्रावक और श्रमण मिलकर मनाते हैं । पर्व के दौरान श्रावकों को संत के सानिध्य में धर्म साधना करने और जगत कल्याणी जिनेंद्र की वाणी को श्रवण करने का अवसरभी मिलता है। पट्टाचार्य ने आगे कहा कि चतुर्थ काल में मुनिराज जंगलों में वृक्ष के नीचे वर्षा वास करते थे,माह- माह के उपवास करते थे और नीरस आहार लेते थे। वर्तमान काल में साधकों में हीन सहनन होने से वह अब जंगलों में वर्षा वास नहीं करते अपितु भवनो में चार माह ठहरकर विशिष्ट साधना करते हैं।
कलश स्थापना के जनक 1973 में चातुर्मास के अवसर पर चातुर्मास मंगल कलश रखने की परंपरा की शुरुआत समाधिस्थ आचार्य विमल सागर जी महाराज के चातुर्मास से प्रारंभ हुई। कलश मंगल का प्रतीक है। मुनि गण तो भक्ति पाठ करके ही चातुर्मास की स्थापना करते हैं।
समारोह में, आचार्य श्री प्रज्ञ सागर जी महाराज, श्रवणबेलगोला के भट्टारक स्वामी चारु कीर्ति जी, अखिल भारतीय शास्त्री परिषद के अध्यक्ष पंडित श्रेयांश जैन बडोत, अनेकों दि० जैन तीर्थों के अध्यक्ष विधायक, राज्यसभा सदस्य एवं इंदौर के वरिष्ठ समाजसेवी आजाद जैन,हंसमुख गांधी,सीए अशोक खासगीवाला, धर्मेंद्र पाटनी,डॉ जैनेंद्र जैन, प्रतिपाल टोंग्या,पंकज जैन (पिंकी),कमलेश कासलीवाल नेमी बड़कुल, मनीष मोना आदि गणमान्य उपस्थित थे। चातुर्मास के प्रथम मुख्य कलश लेने का सौभाग्य दिल्ली के श्री शैलेश धर्मेंद्र एवं पिंटू जैन परिवार ने एवं द्वितीय मुख्य कलश इंदौर के वरिष्ठ समाजसेवी स्वर्गीय हेमचंद की स्मृति में श्रीमती मीना जैन स्वतंत्र जैन एवं भरत जैन परिवार ने प्राप्त किया। धर्म सभा का संचालन विजेंद्र जैन एवं पंडित कमल कुमार कमलांकुर ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Play sound