नीम चौक स्थानक में श्रद्धाभाव से सुना “अनुत्तर धर्म श्रद्धा” विषय पर प्रवचन
रतलाम 5 अगस्त। धर्म के प्रति आस्था, संत-सान्निध्य के प्रति श्रद्धा और सामूहिक साधना की भावना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जैन सोशल ग्रुप रतलाम ग्रेटर द्वारा प्रारंभ की गई “प्रवचन श्रवण श्रृंखला – नई सोच, नई पहल” का शुभारंभ बुधवार को अत्यंत श्रद्धा एवं उत्साह के साथ नीम चौक स्थानक में हुआ।
इस अवसर पर ग्रुप के दम्पत्ति सदस्य सपरिवार उपस्थित हुए तथा वहाँ विराजमान पूज्य सतियाजी प्रफुल्ला श्रीजी म.सा. आदि ठाणा-5 के पावन सानिध्य में दर्शन, वंदन एवं प्रवचन श्रवण का लाभ प्राप्त किया।
पूज्य साध्वीश्री ने “अनुत्तर धर्म श्रद्धा” विषय पर प्रेरक एवं चिंतनपरक प्रवचन देते हुए कहा कि श्रद्धा धर्म की प्रथम सीढ़ी है। सम्यक श्रद्धा के बिना ज्ञान फलदायी नहीं बनता और ज्ञान के बिना चारित्र की शुद्धि संभव नहीं होती। जब जीव निर्मल श्रद्धा के साथ धर्म को जीवन में उतारता है, तभी उसका प्रत्येक विचार, वचन और आचरण आत्मकल्याण का माध्यम बनता है। बाह्य आडंबर से अधिक आवश्यक है अंतःकरण की पवित्रता, क्योंकि वही आत्मा को कर्मबंधन से मुक्त कर मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर करती है।
प्रवचन के पश्चात सभी सदस्यों ने धर्मभावना से ओत-प्रोत होकर सामूहिक वंदना की तथा संकल्प लिया कि पूरे चातुर्मास में रतलाम के विभिन्न उपाश्रयों एवं स्थानकों में विराजित संत-सतियों के दर्शन, वंदन एवं प्रवचन श्रवण का नियमित लाभ लेते हुए इस आध्यात्मिक अभियान को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष जैन सोशल ग्रुप रतलाम ग्रेटर ने रतलाम के सभी स्थानकों में जाकर प्रवचन श्रवण का अभिनव प्रयोग प्रारंभ किया था, जिसे सदस्यों का अभूतपूर्व सहयोग एवं उत्साह प्राप्त हुआ। उसी प्रेरणा से इस वर्ष भी यह श्रृंखला पुनः प्रारंभ की गई है, जिससे अधिकाधिक परिवार धर्म से जुड़कर आध्यात्मिक उन्नति का लाभ प्राप्त कर सकें। कार्यक्रम में अध्यक्ष संदीप चौरड़िया,सचिव यशवन्त पावेचा, सचिव प्रमोद धींग, कोषाध्यक्ष जितेश गेलड़ा सहित बड़ी संख्या में ग्रुप के सदस्य एवं परिवारजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में प्रवचन श्रवण समिति के सदस्य संजय चपरोट, महेंद्र चोपड़ा, महेंद्र खमेसरा का विशेष योगदान रहा। सचिव यशवंत पावेचा ने बताया कि श्रृंखला का उद्देश्य केवल प्रवचन सुनना नहीं, बल्कि संत-सान्निध्य से प्रेरणा लेकर धर्म, संस्कार और आत्मचिंतन को प्रत्येक परिवार के जीवन का अभिन्न अंग बनाना है।