मैसूरु । स्थानकवासी जैन संघ हल्लदकेरी के तत्वावधान में स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा में राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने कहा कि कुछ गलत और भ्रांत धरणा मन में बैठ जाती है, उसे गुमराह हुआ व्यक्ति दिशाहीन होकर भटक जाता है । उन्होंने कहा सत्य और असत्य का निर्णय नहीं कर पता है । पूरा जीवन उस वायरस के शिकार से खोखला हो जाता है । वर्तमान भी खोता है और भविष्य को भी बर्बाद करता है । वह बीमारी एक्स-रे में भी नहीं आती है । डॉक्टर और विज्ञान के पास उसका कोई समाधान नहीं है । इसका शिकार बना हुआ अंदर ही अंदर अशांत परेशान और तनाव ग्रस्त जीवन जीने को मजबूर हो जाता है राष्ट्र संत ने बतायाl समय से पहले और भाग्य से ज्यादा नहीं मिलता है । ऐसा सोचकर पुरुषार्थ हीन हो जाता है । हाथ पर हाथ देकर बैठ जाता है । भाग्य को कोसता रहता है l निराशावादी बनकर शक्तिहीन हो जाता है और अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है । यदि आज का विज्ञान इस पर विश्वास कर लेता तो क्या इतना आविष्कार संभव हो सकता था । देश के जांबाज जवान समय से पहले देश आजाद नहीं होता सोच लेते । अपना बलिदान नहीं करते तो क्या देश आजाद होता ।
जैन संत ने कहा वर्तमान कर्म के द्वारा व्यक्ति अपने भविष्य का निर्माण कर सकता है जो भाग्य के भरोसे सोता है वह महापुरुषों के सिद्धांत के साथ खिलवाड़ कर रहा है । उन्होंने ऐसा करने की इजाजत नहीं दी ।
राष्ट्र संत ने कहा रामायण में कर्म को प्रधानता दी है । गीता में कर्मयोगी बनने की प्रेरणा दी है l भगवान महावीर ने एक पल भी प्रमाद नहीं करने का संदेश दिया है । कुरान में हौसला इतना बुलंद करो खुदा खुद पूछे तेरी राजा क्या है l जागता है वह पता है l विश्व के सभी महापुरुषों धर्म ने व्यक्ति को प्रबल पुरुषार्थ के द्वारा चुनौतियां करने की प्रेरणा दी है । सफलता उसके चरण चूमती है। सक्षम मुनि जी अक्षत मुनि जी ने मंगलाचरण किया घनश्याम ने कौशल मुनि ने विचार व्यक्त किया ।