

अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच महिला शाखा का राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न, कल होगा राष्ट्रीय युवा अधिवेशन
जावरा, 7 अगस्त। स्थानकवासी जैन संघ हल्लदकेरी के तत्वावधान में स्थानक भवन, मैसूरु में आयोजित अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच, नई दिल्ली महिला शाखा का राष्ट्रीय कार्यकारिणी अधिवेशन शुक्रवार को उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। अधिवेशन को संबोधित करते हुए राष्ट्रसंत श्री कमल मुनि कमलेश ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का आह्वान करते हुए कहा कि भोगवाद की पाश्चात्य संस्कृति में डूबकर आध्यात्मिकता की दुहाई देना धर्मगुरुओं और भगवान के साथ अन्याय करने के समान है।
राष्ट्रसंत ने कहा कि हम महापुरुषों की जय-जयकार तो करते हैं, लेकिन उनके सिद्धांतों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं। दैनिक जीवन के आचार, विचार और व्यवहार में भारतीय संस्कृति एवं दर्शन दुर्लभ होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का निर्माण ऋषि-मुनियों के आध्यात्मिक ज्ञान के आधार पर हुआ है, जिसका महत्व आज विज्ञान भी स्वीकार कर रहा है। भारतीय संस्कृति आत्मा को निर्मल, शरीर को निरोग तथा जीवन में धार्मिक संस्कारों का बीजारोपण करती है। इसी संस्कृति के आधार पर भारत को विश्वगुरु बनने का गौरव प्राप्त हुआ।
उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति रोग, तनाव और अशांति के साथ संस्कारों की होली तथा चरित्र का पतन कर रही है। आज पूरा विश्व भारत को आस्था के केंद्र के रूप में देख रहा है और भारतीय संस्कृति को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जबकि हम स्वयं पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण कर विनाश की ओर बढ़ रहे हैं। पाश्चात्य संस्कृति का हमला आतंकवाद के हमले से भी अनंत गुना अधिक खतरनाक है। इससे बचने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक है।
राष्ट्रसंत ने कहा कि संस्कृति की रक्षा धर्म और भगवान की रक्षा से भी बढ़कर है। सादा जीवन, उच्च विचार, योग, नियम, ध्यान और मौन भारतीय संस्कृति के वास्तविक प्राण हैं। ये शरीर को निरोग, आत्मशक्ति को मजबूत तथा आत्मशुद्धि के लिए रामबाण औषधि का कार्य करते हैं।
मंच की राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. आभा गांधी ने कहा कि माता-बहनों को संतान के गर्भ में आने के समय से ही भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों का बीजारोपण करना चाहिए। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मंजू भंडारी ने फैशन की अंधी दौड़ से बचने का आह्वान किया। राष्ट्रीय मंत्री विमल भंडारी ने युवा पीढ़ी को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्यात्म का महत्व समझाने की आवश्यकता बताई। लक्ष्मी पोखरना ने बच्चों के नामकरण में भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों को प्राथमिकता देने की बात कही। शांत पगारिया ने कहा कि भारत भाग्यशाली है कि यहां अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया, हमें उन पर गौरव होना चाहिए।
समारोह की अध्यक्षता मंच की संरक्षक अंतरदेवी बाघमार ने की। संचालन आशादेवी वीरवाल ने किया। तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार सहित विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में महिला पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
अधिवेशन में बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ, भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, बाल विवाह, मृत्यु भोज, बलात्कार तथा घूंघट प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध जनजागृति अभियान चलाने का संकल्प लिया गया। उपस्थित सभी लोगों ने भारतीय संस्कृति की रक्षा एवं संस्कारों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।
स्थानकवासी जैन संघ की ओर से महावीरचंद्र सांखला, सुरेश लुंकड़, प्रकाश भंडारी, सुंदरलाल हिंगड़, धर्मचंद खाबिया एवं भीकमचंद बाफना ने अतिथियों का स्वागत किया।
कल होगा राष्ट्रीय युवा अधिवेशन
महिला अधिवेशन के सफल समापन के पश्चात 8 अगस्त को प्रातः 9 बजे जैन स्थानक भवन, मैसूरु में अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच का राष्ट्रीय युवा अधिवेशन आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न राज्यों से युवा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भाग लेंगे। युवा शक्ति को संस्कार, सेवा, सामाजिक जागृति एवं राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया जाएगा। कार्यक्रम का संचालन मंत्री बुधमल बाघमार करेंगे। उक्त जानकारी अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच के राष्ट्रीय वरिष्ठ मार्गदर्शक अभय सुराणा ने दी।