नेत्रदान कर स्वर्गीय दिलीप कुमार झामर ने मृत्यु के बाद भी दिया मानवता को जीवन का उजाला

20 मिनट की सूचना पर पहुंची लायंस क्लब नेत्र चिकित्सालय की टीम ने कराया नेत्रदान

जावरा। सामाजिक सरोकारों से जुड़े एवं मिलनसार व्यक्तित्व दिलीप कुमार जी झामर का निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे। जीवनभर परिश्रम, संघर्ष और हिम्मत के साथ अपने परिवार के प्रति समर्पित रहे दिलीप जी ने मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का अनुकरणीय संदेश दिया। उनके निधन के पश्चात परिजनों की सहमति से उनका नेत्रदान कराया गया।
विशेष बात यह रही कि नेत्रदान की सूचना मिलने के मात्र 20-30 मिनट के भीतर लायंस क्लब नेत्र चिकित्सालय, जावरा की टीम उनके निवास पर पहुंची और आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर नेत्रदान कराया। उनका यह पुनीत कार्य किसी जरूरतमंद के जीवन में प्रकाश लाने का माध्यम बनेगा।
स्वर्गीय दिलीप कुमार जी झामर की अंतिम यात्रा उनके निवास स्थान जैन वाटिका के सामने राजेंद्र जयंत परिसर जावरा से निकली। अंतिम यात्रा आनंदी हनुमान श्मशान घाट पहुंची, जहां उनके बड़े भाई समाजसेवी अशाेक झामर, विजय झामर की उपस्थिति में छोटे भाई संजय सहित परिजनों पुत्र अमित झामर, शोभित एवं पौत्रगण ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार संपन्न किया।

श्रद्धांजलि सभा में नम हुई आंखें
अंतिम यात्रा एवं श्रद्धांजलि अवसर पर बड़ी संख्या में समाजजन, मित्र एवं परिचित उपस्थित रहे। इस अवसर पर अभय सुराणा ने श्रद्धांजलि सभा का संचालन किया।
श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए राकेश मेहता, अनिल पावेचा, अनिल दसेड़ा, राजकुमार हरण, चंद्रप्रकाश ओस्तवाल, शेखर नाहर एवं सुशील कोचट्टा सहित उपस्थितजनों ने स्वर्गीय दिलीप जी के व्यक्तित्व, संघर्षशील जीवन, परिवार के प्रति समर्पण एवं सहयोगी स्वभाव को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
वक्ताओं ने कहा कि दिलीप जी का जीवन भले ही थम गया, लेकिन नेत्रदान के माध्यम से उनके जीवन का प्रकाश किसी अन्य के जीवन में नई रोशनी बनकर जीवित रहेगा। उनका यह मानवीय निर्णय समाज के लिए प्रेरणादायी संदेश है।

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