अलंकरण सभा में बोले श्रमण संघीय प्रवर्तकश्री प्रकाशमुनिजी मसा-तप, त्याग पर ही टिका है जिनशासन



रतलाम 04 अक्टूबर। मोहन टाकीज स्थित भाग्य से सौभाग्य की ओर चातुर्मास स्थल पर रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय की निश्रा में तपस्या अनुमोदना महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ। इमसें पूज्या महासती श्री चंद्रयशाजी मसा को 61 उपवास की तपपूर्ति पर “तपमेरू” से अलंकृत किया गया। श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट चातुर्मास समिति के तत्वावधान में आयोजित समारोह में प्रवर्तकश्री ने अलंकरण प्रदान करते हुए कहा कि जिनशासन तप, त्याग पर ही टिका है। तप आराधना कर्म निर्झरा के लिए होती है। इससे पूर्व मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा की मासिक नवमी के जाप हुए।
तपस्या अनुमोदना महोत्सव में प्रवर्तक श्री प्रकाश मुनिजी मसा के साथ मधुर गायिका श्री चंदनबालाजी मसा, उप प्रवर्तिनी श्री सुमनप्रभाजी मसा एवं वर्धमान आयम्बिल तप आराधिका श्री प्रफुल्लाजी मसा ने पावन निश्रा प्रदान की। महोत्सव में मालव केसरीजी की मासिक नवमी के जाप पहले सागोद रोड स्थित श्री सौभाग्य तीर्थ पर सुबह जाप हुए। इसके बाद चातुर्मास स्थल पर जाप किए गए।
तपस्या अनुमोदना महोत्सव के आरंभ में महिला मंडल, बहु मंडल ने स्तवन प्रस्तुत किया। श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने तपमेरू अलंकरण और कार्यक्रम की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। समारोह को राजमल चोपडा, अवनि बोहरा, शुभम चत्तर, राजेन्द्र सकलेचा, खाचरौद श्री संघ के महेन्द्र चंडालिया आदि ने संबोधित किया। इस दौरान नासिक, पूना, जलगांव, औरंगाबाद, लिमडी, राजगढ, पेटलावद, थांदला, संभाजी नगर, कोपरगांव, कलवन, मेघनगर आदि कई स्थानों से गुरूभक्त वे खाचरौद श्री संघ पूर्व अध्यक्ष ऋतुराज बुडावनवाला आदि उपस्थित रहे। रतलाम सकल जैन श्रीसंघ की उपस्थिति में अलंकरण समारोह हुआ। इस दौरान मासक्षमण तपस्या के प्रत्याख्यान लेने पर अदिति गंग और पूनमचंद बरबेटा का बहुमान किया गया। संचालन आयुष गंग ने किया। समारोह में श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट चातुर्मास समिति के अध्यक्ष पारसमल वोरा, उपाध्यक्ष इंदरमल चौपडा, मंत्री रखब चत्तर, कोषाध्यक्ष मुकेश चौरडिया एवं भंवरलाल पुंगलिया सहित समाजजन मौजूद रहे।
रतलाम धर्म नगरी, जयवंत नगरी है-प्रवर्तकश्री
तपस्या अनुमोदना महोत्सव में प्रवर्तकश्री प्रकाशमुनिजी मसा ने कहा कि दृढ आत्म बल और मनोबल के बिना ना तो संयम लिया जाता है और ना ही तपस्या होती है। तपस्या दवा है, इससे आरोग्य प्राप्त होता है। तप और त्याग से ही परमात्मा का शासन जयवंत है। महासती चंद्रयशाजी और उनका परिवार धन्य है, जो तप, त्याग के मार्ग पर लगातार अग्रसर है। प्रवर्तकश्री ने कहा कि रतलाम धर्म नगरी और जयवंत नगरी है। यहां दान, तप, संयम यात्रा पर निकलने वाली कई आत्माएं है। संघ में तन, मन, धन से सेवा देने वाले कई श्रावक-श्राविकाएं भी है। दरअसल जहां सौभाग्य ही सौभाग्य होता है, वहां आनंद ही आनंद रहता है। उन्होंने कहा कि तपस्या कर्म निर्झरा के लिए होती है। हमे अनंत पुण्य से संसार के सुख मिलते है। पुण्य कर्म निर्झरा करते-करते ही बंधता है, इसलिए तप और त्याग से कर्म निर्झरा करते रहो।