

रतलाम । अणुव्रत समिति *के तत्वाधान में अणुव्रत उदबोधन सप्ताह 2026 मनाया जा रहा है जिसके तहत जिला सर्किल जेल में नशा मुक्ति दिवस मनाया गया । इस दौरान मुनि श्री कमल कुमार ठाना 2 ने कैदियों को संबोधित किया। अणुव्रत समिति अध्यक्ष अंगूर बाला मांडोंत ने बताया कि कार्यक्रम के प्रारंभ में स्वागत उद्बोधन में जेल अधीक्षक लक्ष्मण सिंह भदौरिया ने कहा कि ”जैन संत आज जेल में बंदियों के नैतिक उत्थान हेतु आए हैं तथा बंदीगण के व्यक्तित्व में सकारात्मक सुधार होता है ।”
अंगूर बाला मांडोत ने कहा कि देश में अशांति के समय शांति का संदेश देने के लिए अणुव्रत आंदोलन चलाया गया था जिसके तहत पर्यावरण स्वच्छ करने व नशा मुक्त समाज बनाने के लिए विभिन्न कार्य किया जा रहे हैं अणुव्रत जीवन का विज्ञान है। मुनिश्री कमल कुमार जी ने कहां की ज्ञान हमें प्रकाश देता है जिसके पास ज्ञान है वह प्रगति करेगा समाज में हर व्यक्ति को ज्ञान की अपेक्षा होती है व्यक्ति अज्ञानता में भटक जाता है तथा अपराध कर बैठता है जो व्यक्ति जीवन का सार समझ लेगा वह व्यक्ति जीवन में कभी गलत कार्य नहीं करेगा उन्होंने कहा कि जो मनुष्य जीवन को समझ लेता है वह व्यक्ति कभी भी झगडे व आतंकवाद में शामिल नहीं होता है गलत कार्य की सजा अवश्य मिलती है इसलिए किसी भी व्यक्ति को गलत कार्य करने से पहले चिंतन करना चाहिए व सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस घर में बड़े बुजुर्गों के सामने विनम्रता रहती है उस घर में कभी कलह नहीं होता है व्यक्ति को जीवन में झुकना सीखना चाहिए तथा विनम्र रहना चाहिए इससे सभी का जीवन अच्छा बन जाता है।
उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के मन में क्रोध का आना स्वाभाविक है पर इस क्रोध को दबाना सीख जाना चाहिए, व्यक्ति नशा कर लेता है तो गलत कार्य करता है इसलिए उन्होंने सभी कैदियों को संकल्प दिलाया कि वे अपने जीवन में कभी भी नशा नहीं करेंगे। सहायक जेल अधिकारी राणावत में कहा कि इतनी शक्ति हमें देना दाता प्रार्थना से कैदियों की दिनचर्या शुरू होती है। इस अवसर पर जेल परिवार को अणुव्रत साहित्य प्रदान किया गया। समिति ने जेल परिसर में पौधारोपण किया तथा सभी कैदी भाइयों को मिठाई वितरित की । कार्यक्रम का संचालन निपुण कोठारी एडवोकेट ने किया तथा आभार प्रदर्शन समिति सदस्य आशीष मांडोत ने किया ।
इस अवसर पर मंत्री रत्ना भटेवरा, दिलीप मांडोत, कमलेश बम, राजेंद्र मांडोत आदि समाज जन जेल के अधिकारी कर्मचारी और 500 बन्दीगण मौजूद थे ।