
रतलाम। रतलाम जिले में आज भी पुरातात्त्विक एवं ऐतिहासिक महत्त्व की बहुमूल्य संपदा विद्यमान है। आवश्यकता है कि इन धरोहरों को सामने लाकर इनके महत्त्व से जनसामान्य को परिचित कराया जाए। उक्त विचार डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर शोध संस्थान, भोपाल के वरिष्ठ शोध अधिकारी एवं पुरातत्त्ववेत्ता डॉ. ध्रुवेन्द्रसिंह जोधा ने गत दिवस रतलाम के अल्प प्रवास के दौरान व्यक्त किए। इस अवसर पर डॉ. जोधा का राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति की ओर से शाल, श्रीफल एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मान किया गया।
जानकारी देते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह पँवार ने बताया कि राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति रतलाम जिले के इतिहास एवं पुरातत्त्व को सामने लाने की दिशा में विगत कई वर्षों से प्रयासरत है। इसी क्रम में संस्था के माध्यम से डॉ. जोधा ने विगत माह माही नदी के तट पर स्थित पुरातात्त्विक महत्त्व के स्थल उच्चानगढ़ सहित अन्य पुरासंपदा-सम्पन्न स्थलों का भ्रमण किया था।
उच्चानगढ़ के उत्खनन हेतु एक विस्तृत कार्ययोजना भी तैयार कर विभाग के समक्ष प्रस्तुत की गई है। विभागीय स्वीकृति प्राप्त होने पर इस दिशा में आगे की कार्यवाही की जाएगी।
श्री पँवार ने बताया कि राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति द्वारा आगामी दिसंबर माह में मालवा की समृद्ध पुरातात्त्विक, सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं ऐतिहासिक परम्पराओं के विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने की कार्ययोजना तैयार की गई है। इस आयोजन की रूपरेखा डॉ. जोधा के मार्गदर्शन में तैयार की गई है।
इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रदीपसिंह राव, रामप्रतापसिंह राठौर, अशोक अग्रवाल (परमार्थ के पथिक), धीरेन्द्रसिंह सरवन, प्रोफेसर डॉ. अर्जुनसिंह पँवार, दीपेन्द्रसिंह राठौर, मोहनराजसिंह पँवार आदि महानुभावों ने राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन हेतु अपने सुझाव प्रस्तुत किए।