संत संस्कृति का आधार साधना का प्राण और मानवता का सिंगार है – गच्छाधीपति श्री उत्तम मुनि जी

राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश जी का अभिनंदन समारोह सम्पन्न

लिमडी (गोपाल अजरामर सकल जैन संघ)। आत्मा के विराट रूप का साक्षात्कार बिना सद्गुरु के तीन कॉल में भी संभव नहीं है उक्त विचार लिमडी गोपाल संप्रदाय के गच्छाधीपति श्री उत्तम मुनि जी ने राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश के अभिनंदन समारोह को व्यक्त करते हुए कहा कि संत संस्कृति का आधार, साधना का प्राण और मानवता का सिंगार है ।
उन्होंने कहा कि मुनि कमलेश मैं अद्भुत क्षमता है संपूर्ण संत समाज के मार्गदर्शक हैं आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ शासन के सजग प्रहरी । गुरुजी ने बताया कि राष्ट्रसंत होकर भी बालक में बालक युवा मे सब में घुल मिल जाते हैं प्रशासनिक क्षमता गजब की है।
उन्होंने कहा कि सभी धर्म जाति और समुदाय के लोगों को साथ में लेकर चलना शासन प्रशासन से सफलताएं लेना मानवतावादी संत है । गुजरात सरकार के पूर्व मंत्री प्रवीण भाई चंपानेरी ने कहा की राष्ट्र संत ज्ञान के भंडार और त्याग की प्रतिमूर्ति है फक्कड़ संत है गुजरात आगमन पर मुख्यमंत्री श्री विजय भाई रुपाणी की ओर से स्वागत करता हूं वसीगरा आपके दर्शनों का लाभ लेंगे और चारों मैंने विचारों का भी जब तक मुनि कमलेश गुजरात में रहेंगे मैं सेवा में जीवन समर्पित करता हूं।
मुनि कमलेश ने भावविभोर होकर कहा कि गुजरात की धरती पर सभी संप्रदाय के संतो से मिले प्यार से मैं अभी भूत हूं शब्दों मे व्यक्त नहीं कर सकता आपका सहयोग ही सफलता में नींव के पत्थर का काम करेगा ।
गोपाल संघ प्रमुख श्री विशाल, चंद्रकांत भाई, अजरामर मंत्री शाह किरण भाई, एडवोकेट विहार धाम के प्रमुख धनसुख भाई गढवी सभी धार्मिक सामाजिक राजनीतिक प्रमुख होने राष्ट्रसंत को आदर की चादर भेंट कर अभिनंदन किया । गुरुदेव ने साहित्य भेंट करके मंगल आशीर्वाद प्रदान कर के उज्जवल भविष्य की मंगल कामना की महासती मंडल ने गुरु भक्ति गीत प्रस्तुत किया ।

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