जनसंख्या नियंत्रण पर कठोर कानून आवश्यक

विश्व जनसंख्या दिवस पर ऑनलाइन परिचर्चा आयोजित

रतलाम । देश और पूरे विश्व की बढ़ती हुई आबादी ने समाजशास्त्रियों तथा सरकार के होश उड़ा दिए जिस रफ्तार से जनसंख्या में वृद्धि हो रही है वह अत्यंत चिंताजनक है आबादी के अनुपात के हिसाब से उचित प्रबंधन के लिए संसाधनों की कमी महसूस होने लगी है वैश्विक महामारी कोरोना ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है । विशेष कर भारत जैसे देश में चिंतित होना स्वाभाविक है जहां हम अन्य विकसित देशों की तुलना में अत्यंत पिछड़े हुए हैं ।वहां यह आंकड़े डराने वाले हैं भारत जैसे देश में जनसंख्या पर नियंत्रण के लिए कठोर कानून की आवश्यकता है । क्योंकि सामाजिक चेतना के अभाव में इसे धर्म विशेष के अधिकारों के साथ जोड़कर देखा जाता है जो हमारे विकास के लिए अत्यंत बाधक है वहीं सामाजिक समरसता में भी मनमुटाव पैदा होता है इसी विषय को लेकर शहर की अग्रणी संस्था शिक्षक सांस्कृतिक संगठन विश्व जनसंख्या दिवस पर शिक्षाविद बुद्धिजीवियों की ऑनलाइन परिचर्चा आयोजित की ।प्रसिद्ध शिक्षाविद साहित्यकार डॉ मुरलीधर चांदनी वाला ने कहा कि आजादी के पूर्व भारत देश की आबादी 35 करोड़ थी आज हम डेढ़ सौ करोड़ के आंकड़े को छूने वाले जो हमारे लिए चिंताजनक तो है ही किसी भी सरकार के लिए यह बहुत बड़ी चुनौती है जनसंख्या के नियंत्रण के लिए सामाजिक चेतना आवश्यक है भारत जैसे बहुत धर्मी तथा संस्कृतियों के देश में लोगों को इसके नियंत्रण के लिए तैयार करना अत्यंत नाजुक और संवेदनशील मुद्दा है । आबादी का यह महाकुंभ कहां जाकर थमेगा पता नहीं ? लेकिन इसके लिए हमारे संसाधनों की सांस फूल गई है सरकारे हांफने लगी है और व्यवस्था चरमराने लगी है यह स्वाभाविक है । जन महाकुंभ का संचालन करना उनके मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना अत्यंत कठिन है इसके लिए जल्द से जल्द कड़े उपाय सरकार को करना होंगे ।
संस्था अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने कहा कि सरकार के साथ-साथ विभिन्न धर्मों के प्रमुख और समाजसेवियों को सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों को आगे आना होगा। इसे जन आंदोलन बनाकर लोगों को जागृत करना होगा कि यह समस्या किसी व्यक्ति, समाज की नहीं अपितु राष्ट्रव्यापी है जिसका निदान अत्यंत आवश्यक है । यह कठोर कानून लाकर के ही नियंत्रित की जा सकती है जिसके लिए हमें तैयार रहना होगा।
पूर्व प्राचार्य गोपाल जोशी ने कहा कि वैसे तो हम कई समस्याओं से जूझ रहे लेकिन अन्य समस्याओं की जड़ जनसंख्या पर ही निर्भर है बढ़ती हुई आबादी समस्याओं को सुलझाने में सबसे बड़ी बाधक है । शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी व्यवस्थाएं इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होती है जल्द से जल्द जनसंख्या नियंत्रण कानून को सरकार को लाना चाहिए ।
राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त प्राचार्य आर.एन. केरावत ने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए कठोर कानून लाना आवश्यक है। सरकार के साथ-साथ राजनीतिक दलों तथा अन्य संगठनों को इसके लिए पहल करना होगी। शासकीय सुविधाओं से तथा अन्य सुविधाओं का लाभ ले रहे लोगों को इससे वंचित करना होगा तभी इसके अच्छे परिणाम आएंगे।
पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी डॉ सुलोचना शर्मा ने कहा कि एक देश एक संविधान वहां इस तरह की विसंगति नहीं होना चाहिए हमें धर्म जाति और संप्रदाय से ऊपर उठकर सोचते हुए इसके लिए आवश्यक जरूरी और कठोर कदम उठाना होंगे तभी इस समस्या का समाधान संभव है।
सपाक्स आंदोलन के प्रणेता राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि हम समस्याओं को बढ़ने देने का इंतजार करते हैं यही हमारी सबसे बड़ी समस्या है इस गंभीर मुद्दे के प्रति हम सब आंख मूंदकर खड़े हैं जो आने वाली पीढ़ी के लिए अत्यंत भयानक होगी हमें चेतना होगा लोगों को जगाना होगा सहजता से या कठोरता से ।
दशरथ जोशी ने कहा सरकार हम दो हमारे दो नारे का अनुसरण कर सभी जाग्रत करने हेतु जन जाग्रति की आवश्यकता है । सभी को कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर गर्व महसूस कर सकते हैं देश की जनसंख्या नियंत्रण कर आर्थिक संकट से उबार सकती है ।
भारती उपाध्याय ने कहा कि अब स्थिति इतनी भयानक हो गई है कि सरकारों की आंख खुलने लगी है और सामाजिक संगठन भी जागने की कोशिश कर रहे हैं और यह बदलाव तभी संभव होगा जब समाज की तरफ से आवाज उठे कि हां हम अब बदलने को तैयार हैं । सिर्फ सरकार के भरोसे रहने से काम नहीं चलेगा ।  संप्रदायवाद और धार्मिक मान्यताओं से ऊपर उठकर समाज हित में सोचना होगा तभी इसके सकारात्मक परिणाम आ सकेंगे।
वीणा छाजेड़ ने कहा कि संसाधनों की निरंतर कमी इस बात का प्रमाण है कि हमारी जनसंख्या कहां जा रही है यही रफ्तार रही तो देश में अनाज और अन्य वस्तुओं का संकट उत्पन्न हो जाएगा एक समस्या के पीछे दूसरी कई समस्याएं खड़ी हो रही है जो हमारी युवा पीढ़ी के लिए अत्यंत खतरनाक है
प्रतिभा चांदनी वाला ने कहा कि हमारा समग्र विकास ही जनसंख्या पर निर्भर है। विश्व गुरु बनना है तो सर्वप्रथम जनसंख्या नियंत्रण होना आवश्यक है। जब ही हम राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक ,व्यापारिक ,शैक्षणिक ,स्वास्थ्य विभाग, वैज्ञानिक आदि में देश के प्रत्येक नागरिक की उन्नति होगी। तब देश आगे बढ़ेगा। कानून बने और सम्पूर्ण देश में एक साथ लागू हो उसमें किसी भी राजनेता या पार्टी का स्वार्थवश बीच में नहीं आये तभी हम भविष्य के सुन्दर सपने की कल्पना कर सकते हैं।
पूर्व अध्यक्ष राधेश्याम तोगड़े ने कहा कि देश के राजनीतिक दल इस समस्या के जड़ में है जो अपने निजी स्वार्थों के कारण सामाजिक व्यवस्था का बहाना बनाकर वोट बैंक की खातिर कठोर कानून के पक्ष में नहीं रहते हैं
पूर्व अध्यक्ष कृष्ण चंद्र ठाकुर ने कहा कि हमें अब जगाना होगा और जागना होगा कठोर से कठोर कानून लाकर दो से अधिक बच्चे वालों को शासकीय सुविधाओं से बेदखल करना चाहिए चुनाव लड़ने पर पाबंदी और अन्य सुविधाओं से वंचित करना होगा ।
रमेश परमार ने कहा कि हम बहुत आधुनिक बन रहे हैं लेकिन जनसंख्या बढ़ाने में आज भी पुरानी सोच को पाले हुए हैं हमें बदलना होगा हमारी मानसिकता और विचारों को बदलना होगा तभी इस पर नियंत्रण संभव है ।
दिलीप वर्मा ने कहा कि हमारा देश बढ़ती हुई आबादी के कारण विकास की दौड़ में पिछड़ा हुआ है छोटे-छोटे अन्य राष्ट्र आज हम से बहुत आगे हैं क्योंकि उनके संसाधनों पर दबाव नहीं रहता है छोटा देश तरक्की की राह में सबसे आगे रहता है।
देवेंद्र वाघेला शिवगढ़ ने कहा कि भारत जैसे देश में आबादी का निरंतर बढ़ना हमारे विकास में अत्यंत बाधक है शिक्षा और अन्य क्षेत्रों पर इसका जबरदस्त प्रभाव पड़ रहा है संसाधनों पर अनावश्यक दबाव सरकार की असफलताओं का कारण है ।
रमेश उपाध्याय ने कहा कि सरकार आखिर कितना करें यह नागरिकों को भी दायित्व है कि वह इस समस्या को समाधान की दिशा में ले जाएं।
श्याम सुंदर भाटी ने कहा कि बच्चे दो ही अच्छे का नारा पुन: बुलंद करना होगा लोगों को इसके लिए जागरूक करना चाहिए कि छोटा परिवार सुखी परिवार का आधार है बेरोजगारी भुखमरी की समस्याएं बढ़ती हुई जनसंख्या की ही देन है इसके लिए कठोर कानून सरकारों को लाना चाहिए
रक्षा के कुमार ने कहा कि समस्याएं इतनी विकराल है जिसका समाधान कठोर कानून से ही संभव है राज्य सरकारों के साथ साथ केंद्र सरकार को भी इसमें पहल करना होगी समान नागरिक संहिता लागू कर जनसंख्या नियंत्रण पर काबू पाया जा सकता है जो आने वाली पीढ़ी के लिए अत्यंत आवश्यक है ।
चंद्रकांत वाफगावंकर ने कहा की दुनिया की आबादी का 60 प्रतिशत हिस्सा हमारे देश का है भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ी आबादी वाला देश हे और सरकारों के साथ-साथ आम आदमी का चिंतित होना स्वाभाविक है कष्ट और दुख जनता को उठाना पड़ रहा है इसलिए वही इसके नियंत्रण की पहल को बुलंद करें।
ऑनलाइन परिचर्चा में नरेंद्र सिंह राठौड़, मिथिलेश मिश्रा, अनिल जोशी, मदन लाल मेहरा मनोहर प्रजापति, बीके जोशी, आरती त्रिवेदी, पूर्व प्राचार्य ओपी मिश्रा, कविता सक्सेना, उत्सव लाल सालवी आदि ने भाग लिया।  संचालन दिलीप वर्मा तथा आभार रक्षा के कुमार ने व्यक्त किया ।