अयोध्यापुरम तीर्थ में आचार्य श्री बंधु बेलड़ी की पावन निश्रा


रतलाम। फागन तेरस पर्व पर गुजरात के विश्व विख्यात शत्रुंजय तीर्थ पालिताना में छह गाँव परिक्रमा फागन फेरी अवसर पर देशभर से जैन धर्मावलम्बी पहुँचे। मंगल प्रसंगे अयोध्यापुरम तीर्थ में दो दिवसीय पाल भक्ति रखी गई। यंहा रतलाम,मंदसौर,नीमच जिले से कोई 250 से ज्यादा भक्त दर्शन वंदन के लिये पहुंचे।
तीर्थ प्रेरक-मार्गदर्शक एवं निश्रा प्रदाता पू.आ.श्री बंधु बेलड़ी श्री जिनचन्द्रसागर सूरीश्वर जी म.सा. के महामांगलिक श्रवण के साथ पाल भक्ति की शुरुआत हुई। विगत दो वर्षो से कोरोना संक्रमण के कारण पाल भक्ति का आयोजन वृहद स्तर पर आयोजित नहीं हो पा रहा था लेकिन इस कमी को इस बार भक्तों के भरपूर उत्साह ने पूरा कर दिया है। दो दिनों तक सुबह से लेकर शाम तक पाल भक्ति चलती रही।
हजारों आँखों ने निहारा-
तीर्थ परिवार द्वारा अक्षत – तिलक के साथ संघ की अगवानी की गई । मूलनायक दादा आदिनाथ की भव्य 24 फिट की प्रतिमा की नयनाभिराम अंग रचना को हजारों आँखों ने निहारा। फागण तेरस को छह गाँव की परिक्रमा एवं शत्रुंजय तीर्थ यात्रा करने जाने वाले हजारों की संख्या में भक्तों ने अयोध्यापुरम तीर्थ में दादा के दर्शन किये । यंहा विराजित पू. पू.आ.श्री बंधु बेलड़ी का वंदन करते हुए सुख साता पूछी । दो दिनों तक यह सिलसिला चलता रहा। संगीतकार ऋषभ निलेश पालीताना ने अपने भजनों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
108 हो गये लाभार्थी परिवार-
पाल भक्ति शुभारम्भ प्रसंगे गणिवर्य श्री आनंदचन्द्रसागर जी म.सा. ने पाल भक्ति के महत्व को बताया । तीर्थ में विराजित साधु साध्वी जी ने निश्रा प्रदान की । ट्रस्टी श्री जयंत भाई मेहता ने स्वागत उदबोधन में बताया कि यंहा रिकार्ड 108 लाभार्थियों ने पाल भक्ति की सेवा का लाभ लिया है। जिससे यह उत्सव सौराष्ट्र का सबसे बड़ा आयोजन बन गया है। इस वर्ष भी कई भक्तों ने आगामी वर्ष के लिए अग्रिम लाभ लिया। दो दिनों तक चले भक्ति समारंभ में देशभर से पहुंचे भक्तों की यंहा भक्तिभाव के साथ सेवा की गई। राजकोट, सुरत,अहमदाबाद,भावनगर, इंदौर,रतलाम सहित अन्य स्थानों से आये भक्तों ने दो दिनों तक आगुन्तकों की सेवा की।