
भीलवाड़ा केसरिया पारस 25 मार्च 2022 । पाश्चात्य संस्कृति के रंग में रंग कर आध्यात्मिकता का राग अलापना धर्म आत्मा और परमात्मा के साथ धोखा है उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने संबोधित करते कहा कि पाश्चात्य संस्कृति का हमला संपूर्ण मानवता के लिए आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का निर्माण महापुरुषों के आध्यात्मिक ज्ञान के सहारे हुआ है जिसका लोहा आज विज्ञान भी मान रहा है।
मुनि कमलेश ने बताया कि दैनिक जीवन शैली मैं आध्यात्मिकता के दर्शन दुर्लभ नजर आ रहे योग ध्यान भक्ति साधना के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं । राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि पाश्चात्य संस्कृति ने विलासिता भोगवाद रोग अशांति को जन्म दिया है इससे मुक्ति पाए बिना शांति संभव नहीं ।
जैन संत ने कहा कि पूरा विश्व भारतीय संस्कृति को अपना कर गौरव महसूस कर रहा है दुर्भाग्य है जिसको विदेशी गंदगी समझ के थूक रहे हैं हम उसे चाट रहे हैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं भारतीय संस्कृति से ही हिंदुस्तान को विश्व गुरु बनने का सौभाग्य मिला इस विश्व शांति निहित है । अशोक पोखरना हेमंत आचलीया सुशील चपलोत कांतिलाल जैन शांतिलाल काकरिया पारस पीपाड़ा दिनेश मेहता जतन जैन कन्हैया लाल पारक हिम्मत बाफना सुरेश डांगी राजेंद्र राका प्रकाश चंडालिया राजेंद्र राका आदि गुरु भक्तों ने विहार सेवा का लाभ लिया । पुलिस प्रशासन की सेवाएं प्रशंसनीय रही । 26 मार्च को स्वाध्याय भवन न्यू आजाद नगर में प्रातः 9:00 प्रवचन होंगे।