संगठन धर्म का प्राण है इसके बिना मोक्ष असंभव – राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश

भीलवाड़ा आजाद नगर स्वाध्याय भवन 26 मार्च 2022 । एक-एक तिनका अलग अलग दिख रहा है अस्तित्व विहीन हो जाता है रस्सी का रूप ले ले तो हाथी बांधने की क्षमता निर्मित हो जाती है। उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने संबोधित करते कहा कि संगठन धर्म का प्राण है इसके बिना मोक्ष असंभव।
उन्होंने कहा कि एकता की नींव पर ही अहिंसा की मंजिल खड़ी की जा सकती है एकता में विश्वास नहीं अहिंसा उसके पास नहीं । मुनि कमलेश से कहा कि कलयुग में संगठन परमात्मा से महान सर्वोपरि धर्म है सभी महापुरुषों ने संगठन को सर्वोपरि माना उसके निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। राष्ट्रसंत ने बताया कि संगठन किसी भी नाम से हो उसका उद्देश्य संपूर्ण मानवता को एकता के सूत्र में पीरोने का हो वह वंदनीय पूजनीय है।
जैन संत ने बताया की जाति पंथ भाषा और प्रांत के नाम पर कट्टरता अपनाने वाले धर्म द्रोही है और देशद्रोही है विश्व का कोई भी धर्म कट्टरता अपनाने की इजाजत नहीं देता वह हिंसा की जननी है प्रवीण कोठारी नेमी चंद सुराणा बसंती लाल मेहता राजेश बापना महेंद्र पोखरना पन्नालाल पगारिया आदि ने अभिनंदन किया मंजू पोखरना कुसुम चपलोत संतोष पगारिया गुरु भक्ति गीत प्रस्तुत किया।