श्री आदिनाथ मेमोरियल ट्रस्ट एवं शुभचिंतक फाउंडेशन ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान मे आनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी (वेबीनार) का आयोजन

भगवान् ऋषभदेव जन्म कल्याणक के शुभ अवसर पर श्री आदिनाथ मेमोरियल ट्रस्ट एवं शुभचिंतक फाउंडेशन ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान मे भारतीय संस्कृति में ऋषभदेव विषय पर आनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी (वेबीनार) का आयोजन जूम मीटिंग के माध्यम से किया गया। इसकी अध्यक्षता डॉ. नीलम जैन ने की, मुख्य अतिथि प्रसिद्ध पुरातत्वविद डा मैनुअल जोजेफ एवं समारोह गौरव के रूप मे सेवा निवृत जज श्री अभय गोहिल जी ने शामिल हुये। आपने बताया कि ऋषभदेव ने जगत को असि मसि और कृषि का पाठ पढाया और कर्म भूमि (युग) की शुरुआत की ।वक्ता के रूप मे प्रो वीर सागर जी ने हिंदी साहित्य के मूर्धन्य विद्वान भारतेंदू हरिश्चंद्र द्वारा जैन कौतूहल मे दिये एक दोहे को उद्धृत करते हुये कहा कि ऋषभदेव ही विश्व के प्रथम व्यवस्थापक और कर्म एवं धर्म सस्कृति के निर्माता है। प्रसिद्ध इतिहासकार डा. पवन गौड ने बताया कि प्रागैतिहासिक काल से ही ऋषभ के प्रमाण मिलते है जिनमे सिंधुघाटी और वेदो पुराणो के साथ ही अन्य देशो के पुरातत्व मे भी मिलते है। प्रसिद्ध महिला इतिहासकार डा. रिजवाना जमाल ने बताया इनका जन्म अयोध्या के इक्ष्वाकु वंश मे हुआ जिसका एक नाम विनीता भी है और श्रीराम भी उसी अयोध्या नगरी और इक्ष्वाकू वंश मे जन्मे इसके प्रमाण वेदो पुराणो मे अन्य साहित्य मे भी मिलते है। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त जैन विदुषी अध्यक्षा डा नीलम जैन ने कहा कि आज का कार्यक्रम सर्वधर्म समभाव का एक उदारण बन गया जिसमे अनेक पंथ परपराओं के देशी विदेशी विद्वानो ने जुड कर ऋषभदेव के वैश्विक महत्व और उनके प्रचलित विभिन्न नामो रूपो को बताया और भारतीय संस्कृति की वसुधैव कुटुंबकम की परंपरा का समन्वित स्वरूप प्रकट किया तथा अपने तथ्यपूर्ण उद्वबोधनो से कार्यंक्रम को सफल बनाया। कार्यक्रम का सुंदर सफल व संचालन सह संयोजक जैन युवा विदुषी डा. ममता जैन ने किया। संयोजक शैलेंद्र जैन ने वेबीनार मे शामिल हुये सभी विद्वतजनो एवं जुडे सभी साथियों का हृदय से आभार प्रकट किया और बताया कि इस तरह के आयोजनो से भारतीय संस्कृति के महापुरुषो की शिक्षाओं और उनके द्वारा मानवता के लिये किए गये कल्याण कारी कार्यों से समाज परिचित होगा और उनके महत्व को समझ सकेगा।