- क्या रतलाम का खुफिया तंत्र हुआ फेल ?
- इसका जवाबदार कौन? क्या होगी जवाबदारो पर कार्यवाही?
रतलाम (निलेश बाफना)। अभी विगत दिनों राजस्थान पुलिस की कार्रवाई पर जो देशद्रोही आरडीएक्स के साथ पकड़ाए है वह रतलाम के सूफा संगठन से जुड़े हुए हैं। अब जनता में यह प्रश्न उठ रहा है कि जो संगठन नफरत फैलाने के लिए बना है और वह विगत कुछ वर्षों पहले ही सक्रिय हुआ । वहीं ताज्जुब की बात है कि उस समय के तत्कालीन जवाबदार ने उसको खत्म होना भी बता दिया ? जनचर्चा है कि आखिर यह जवाबदार किस आधार पर ऐसी संस्था खत्म होना बताते हुए इस संगठन की फाइल को या तो ठंडे बस्ते में डाल दिया गया या बंद कर दिया गया? प्रश्न रतलाम की जनता के मन में यह भी है कि अभी रतलाम प्रशासन ने जो त्वरित कार्यवाही की वह सराहनीय है । परन्तु उस समय जब यह संगठन सक्रिय हुआ था और वारदातों को अंजाम दिया था तब इनके खिलाफ पुख्ता कार्रवाई क्यों नहीं की गई ? क्यों इस संगठन की फाइलों को दबा दिया गया ? क्यों संगठन के जो रहनुमा थे उन पर कोई आंच नहीं आने दी गई और सरकारी रिकॉर्ड में इस संगठन को खत्म होना बता दिया गया ? आखिर इतनी जल्दी क्यों की गई? क्या उस समय के तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी की जवाबदेही नहीं थी? यह रतलाम की आम नागरिकों के मन में एक प्रश्न है। आशा मध्यप्रदेश शासन से लगाई जा रही है कि वह नफरत की भावना फैलाने वाले संगठनों से सख्ती से निपटा जाए है । सिर्फ अपराधियों के मकान तोडऩे से यह कार्यवाही खत्म नहीं होने चाहिए । अब इस संगठन से जुड़े जितने भी लोग हैं चाहे वह प्रत्यक्ष रूप से हो या अप्रत्यक्ष रूप से उन पर सख्त से सख्त कार्यवाही होना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे संगठन प्रदेश में पैदा ना हो सके। मध्यप्रदेश शासन को चाहिए की उस समय के जो जवाबदार अधिकारी थे जिन्होंने इस संगठन की फाईल ठंडे बस्ते में डाल दी थी या बंद कर दी थी उनसे भी जवाब तलब होना चाहिए ? ज्ञात हो कि आतंकवादी गतिविधियों में रतलाम का नाम शुरू से ही रहा है सबसे पहले रतलाम का नाम एक बड़े आतंकवादी संगठन से जुड़े एक सदस्य के रतलाम निवासी के रूप में आया था फिर उसके बाद दो आतंकवादियों को जो कि सिमी संगठन के बताए जाते थे उनकी मुठभेड़ एटीएस के साथ रतलाम में भी हो चुकी है इतनी गतिविधि होने के बाद भी रतलाम में खुफिया तंत्र क्यों फेल हो रहा है यह एक विचारणीय प्रश्न है ? जो सूफा संगठन के सदस्य पकड़े है वह सभी रतलाम निवासी है आखिर इनका रहनुमा कौन है? क्या प्रशासन उस पहलू पर भी गहराई से जांच करेगा? साथ ही प्रशासन का सूचना तंत्र कहां कमजोर हो रहा है इस विषय पर भी गंभीर चिंतन की आवश्यकता है ? इस गतिविधि के बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि रतलाम शहर जो अमन एवं शांति का प्रतीक माना जाता है वह बारूद के ढेर पर खड़ा है? जनता की प्रशासन से सिर्फ यही उम्मीद है कि ऐसे संगठनों को नेस्तनाबूद कर जो भी ऐसे संगठनों को संरक्षण देते हैं उन पर भी कार्यवाही कर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि रतलाम में अमन एवं शांति का वातावरण बना रहे।