समग्र मालवा के बेनर तले उर्दू पुस्तक ‘जावरा से जावरा तक ‘का विमोचन


जावरा (अभय सुराणा) । भाषा शब्दों को श्रंगारित प्रदान करती है तथा व्यक्तित्व को निखारती है ।भाषा से ही व्यक्ति की पहचान होती है वह अंहकार नहीं सम्मान की प्रतीक होती है। भारत में सभी मुद्राओं (नोट) पर 15 भाषाएं अंकित है यह भाषाओं को भारत में दिये जाने वाला सम्मान का प्रतीक है ।उपरोक्त विचार अटल ग्राम विकास सामाजिक संगठन के संस्थापक अभय कोठारी ने समग्र मालवा के तत्वावधान मे उर्दू पुस्तक ‘जावरा से जावरा तक ‘ के विमोचन अवसर पर श्री राम विद्या मंदिर में उपस्थित जनों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
प्रकाशित पुस्तक नगर के एक मात्र उर्दू गद्यकार ग्यासुर्रहीम ‘शकेब ‘के आलेखो-संस्मरणो का संकलन है।इसे डा.प्रो.शबाना निकहत अंसारी ने संपादित कर प्रकाशित कराया है। विमोचन समारोह अत्यंत गरिमामय और एतिहासिक रहा। नगर के इतिहास में पहली बार उर्दू में प्रकाशित पुस्तक का विमोचन हुआ हे यह संस्था एवं जावरा नगर के लिए गोरव एवं एतिहासिक हे कि संस्था द्वारा पहली बार उर्दू की किसी पुस्तक का विमोचन किया गया है जिसमे उर्दू आलेखो का संकलन है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अटल ग्राम विकास सामाजिक संगठन के संस्थापक अभय कोठारी,विशेष अतिथि कवि राजेन्द्र श्रोत्रिय एवम् राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अमजद अली थे।अध्यक्षता डा.शबाना निकहत अन्सारी ने की।
आरम्भ मे समस्त अतिथियो द्वारा सरस्वती पूजन किया गया ।जिसे रतनलाल उपाध्याय ने मंत्रोपचार के साथ सम्पन्न कराया ।
इस अवसर पर श्री उपाध्याय ने सरस्वती वन्दना भी प्रस्तुत की।अतिथियो का पुष्प मालाओ से स्वागत संस्था के पदाधिकारी श्री जगदीश उपमन्यु,मनोहर सिंह चौहान, रतनलाल उपाध्याय, आरिफ कुरैशी,ओम प्रकाश शिकारी,अनीस अनवर, कारुलाल जमडा,अकबर मिर्जा , आदि ने किया।
अपने उद्बोधन मे राजेन्द्र श्रोत्रिय ने कहा”आजकल पढने का रिवाज ख़त्म होता जा रहा है।हर घर मे बच्चो को पुस्तके की आदत विकसित करना जरूरी है।तभी सांस्कृतिक विरासत नयी पीढ़ी तक पहुँचेगी। श्री सैयद अमजद अली ने कहा की अभय कोठारी ने उर्दू के प्रति जो सदाशयता दिखाई है इससे इनका कद और बड़ा हो गया है।
श्री अभय कोठारी ने समग्र मालवा और अटल ग्राम विकास सामाजिक संगठन की स्थापना,उद्देश्य, निरन्तर किए जा रहे सामाजिक, शैक्षणिक एवम् साहित्यिक कार्यो पर विस्तार से प्रकाश डाला।आपने कहा की गौरव के क्षण है जब इस संस्था से नगर के एक रचनाकार की पुस्तक का विमोचन हो रहा है।भाषा का कोई प्रश्न नही,हर भाषा शब्दो का श्रृंगार करती है।कोई भी भाषा शब्दो को विकृत नही करती।
पुस्तक के लेखक शकेब सा ने समारोह के आयोजको के प्रति आभार प्रकट किया।आपने कहां की मुझे जो सम्मान दिया गया हे गर्व प्रदान कर रहा हे ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डा शबाना निकहत ने कहा शकेब सा.सदैव अपनी पुस्तके और मार्गदर्शन प्रदान करते रहे हे ,इसी का नतीजा है जो मै इस पुस्तक को सम्पादित कर सकी।
अतिथियों द्वारा प्रकाशित पुस्तक का विमोचन कीया ।
इस अवसर पर कवि एवम् कहानीकार रमेश मनोहरा ,श्रीमती शबाना निकहत और श्री शकेब सा . का शाल श्रीफल एवम् साफा बांधकर सम्मान किया गया।साथ ही अतिथिगण श्री अभय कोठारी,श्री अमजद अली,श्री राजेन्द्र श्रोत्रिय, हाजी अनीस अंसारी बुरहानपुर का भी साफा बांधकर सम्मान किया गया।
अन्त मे आभार प्रदर्शन अनीस अनवर ने किया। कार्यक्रम का संचालन श्री गुलाम मोईनुद्दीन मोईन ने किया।