क्रांतिकारी वीर पुरुष ही अहिंसा का पालन कर सकता है – राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश

भीलवाड़ा हनुमान मंदिर 6 अप्रैल 2022 । अहिंसा को कोई कायरता डरपोक और बुजदिल के नाम से पुकारता है अहिंसा के अर्थ से अनभिज्ञ है अहिंसा को बदनाम कर रहा है उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने कहा की क्रांतिकारी वीर पुरुष ही अहिंसा का पालन कर सकता है।
उन्होंने कहा कि हिंसा को देखकर हाथ पर हाथ दे कर बैठ जाता वह अहिंसा को कलंकित और बदनाम कर रहा है।
मुनि कमलेश ने बताया कि जुल्म करना हिंसा है तो जुल्म को सहना भी हिंसा है जुल्म का प्रतिकार करना सच्ची अहिंसा है।
राष्ट्रसंत ने कहा कि जीने मरने की परवाह न करते हुए कफन का टुकड़ा सिर पर बांधकर हिंसा को रोकने के लिए मैदान में उतरता है वही सच्चा अहिंसा वादी है।
हनुमान मंदिर के स्वामी जी ने कहा कि विश्व का कोई भी धर्म हिंसा की इजाजत नहीं देता हिंसा वादी राक्षस और शैतान से कम नहीं है रामनवमी महावीर जयंती हनुमान जयंती 7 दिवसीय आयोजन प्रारंभ किया गया।

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