मंदिर जाओ तो प्रभु प्रसन्न हो, उपाश्रय जाओ तो साधु प्रशंसा करें, ऐसा उज्जवल जीवन बनाये – पू.मुनिश्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.

श्रीसंघ के सैकड़ों आराधक कर रहे हैं सामुहिक आराधना, प.पू. प्रवचन प्रभावक मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा. की निश्रा में मुम्बई में सर्वप्रथम आराधना

मुम्बई । श्री नवपद औलीजी की आराधना के अंतर्गत पूज्यपाद दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेंद्र सूरीश्वरजी महाराजा साहेब के अष्टम पट्टधर प.पू.परोपकार सम्राट आचार्यदेव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के सुशिष्यरत्न प.पू.प्रवचन प्रभावक मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.ने नवपद ध्याओ, परमपद पाओं सूत्र को मोटो करते हुए कहां नवपद में सार है व नवपद में पार भी है। सार से सुख मिलता है एवं पार से दुख मिटता है। देव गुरु धर्म की आराधना त्रिवेणी नवपद में समाहित है। अरिहंत प्रभु अपने ज्ञानातिशय से संशय का समाधान करते हैं एवं पापों से बचने के लिए सावधान भी बनाते हैं। नवकार, भवपार होने का जहाज है,नवपद औलीजी की निरंतर आराधना करने वाला इस जहाज में स्थान प्राप्त कर मुक्ति नगर पहुंच सकता है। युवासंत मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.ने धर्म शंखनाद करते हुए कहा *मंदिर जाओ तो प्रभु प्रसन्न हो, उपाश्रय जाओ तो साधु प्रशंसा करें, ऐसा उज्जवल जीवन बनाये। ओजस्वी तत्वचिंतन युक्त प्रवचन धारा द्वारा पुण्यात्माओं का हदय‌ परिवतंंन हो रहा है। मुंबई के जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक श्रीसंघ सोनावाला ताडदेव में मुनिश्री के सानिध्ये मुंबई में प्रथम बार सैकड़ों आराधक आराधना कर रहे हैं। इससे पूर्व श्रीसंघ ने सामूहिक गुरु वंदन किया। गुरुदेवश्री ने मंगलाचरण कर मंत्रमुग्ध किया । मुनिश्री ने स्व रचित सुंदर नवकार गीत प्रस्तुत किया। इस मौके पर तपस्वी संत मुनिश्री जनकचंद्र विजयजी म.सां ने कहा चारगति से बचे तो ही मानव जीवन सार्थक है वरना सब व्यर्थ है। देव गुरु की आराधना कर कर्म निर्जरा करे। पापों से बचे वहीं आत्मा जागृत हैं। नरक से बचे वही वैरागी है। बड़ों के साथ रहे व उन्हें समर्पित बने वही सदाचारी है। आगामी रविवार को श्रीसिद्धचक्र महापूजन का सामूहिक आयोजन निकट के स्कूल हाल में होगा। प्रतिदिन विभिन्न भाग्यशालियों द्वारा आयंबिल तप एवं प्रभावना आदि का लाभ लिया जा रहा है। प्रतिदिन प्रातः 09:15 से प्रवचन धारा नवपद‌ ध्याओ,परमपद पाओ टाईटल के साथ गतिमान है। स्मरण हो 06 अप्रैल को गुरु भगवंतों का श्रीसंघ द्वारा समैया युक्त सोनावाला संघ में भव्य मंगल प्रवेश हुआ था।

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