

अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महामुनिराज ने तीर्थराज सम्मेदशिखर जी के पारसनाथ टोंक से अपने उवाच में बताये की (14 अप्रैल विशेष सर्वोत्तम) सफलता की तीन सीढ़ी
ऊंची सोच, कड़ी मेहनत और पक्का इरादा।
कर लो दृढ़ संकल्प, देवता चरण पखारेंगे।
व्रत संकल्प की ओर बढ़ते कदम
लक्ष्य और संकल्प ही सफलता की कुंजी नहीं है। साथ में वैसी मेहनत, वैसा इरादा और वैसा ही समर्पण – फिर कर लो दुनिया मुट्ठी में बन्द। शिक्षक ने आठवी क्लास के विद्यार्थियों से पूछा* – कौन क्या बनना चाहता है-? *बराक ओबामा ने कहा – मैं अमेरिका का राष्ट्रपति बनना चाहता हूँ। और वह 50 की उम्र से कुछ साल पहले ही उस सिंहासन पर आसीन हो गये। छोटी उम्र में लक्ष्य, संकल्प और समर्पण से ही यह सम्भव हो पाया।
हमने भी परतापुर (राजस्थान) 1988 में, तपस्वी सम्राट के 32 उपवास के पारणा की पत्रिका देखी और संकल्प लिया – हम मरने से पहले 32 उपवास जरूर करेंगे।नागपुर 2015 वर्षायोग में हिम्मत की और 32 उपवास कर लिये।
स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने किशोरावस्था में ही गायिका बनने का लक्ष्य बनाया, संकल्प लिया और उनके समर्पण ने इतिहास रच दिया। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री दामोदर नरेन्द्र मोदी जी ने पुरा जीवन लगा दिया प्रधानमंत्री बनने के लिये और आज विश्व के सरताज बनकर सबके दिलों पर राज कर रहे हैं। *समर्पण के साथ जीने वाले कभी पीछे मुड़कर नहीं देखते। संकल्प करने से आधी यात्रा और समर्पण करने से पुरी यात्रा तय हो जाती है। सभी के अन्दर एक ऐसी शक्ति मौजूद है — *जो अपने भीतर की शक्ति को जान लेता है, फिर वो सबकी जान बन जाता है।
इसलिए – पहले लक्ष्य बनाओ फिर संकल्प लो और पुरी समग्रता से उसे प्राप्त करो। *संकल्प, मेहनत और प्रयास से हम असम्भव कार्य को भी सम्भव कर सकते हैं और सफलता की राह को पा सकते हैं।
जितना मन मजबूत होगा, लक्ष्य उतने ही करीब होगा..*
जितनी ज्यादा मेहनत होगी, उतनी ही शानदार प्रगति होगी..!
मेहनत, संकल्प और प्रयास दूसरों को नीचा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा और कौशल को निखारने के लिये होना चाहिए। *बिना मेहनत, संकल्प, त्याग के, लक्ष्य तक पहुंचना मुमकिन नहीं है (देखा नहीं अभी आपने – यू.पी के चुनाव में बड़े बड़े दिग्गजों ने जी जान से मेहनत की, तो 273 सीट की शानदार जीत हासिल की)। *कुछ बड़ा करने के लिये या पाने के लिए सब सुख सुविधाओं का त्याग करना पड़ता है। स्कूल में पास तो सब बच्चे होते हैं लेकिन डिविजन पाने के लिये, रात दिन एक करना पड़ता है। पहले हम कुछ हासिल करने के लिए मेहनत करते हैं, फिर पाये हुए को कायम रखने के लिये। उसके लिए कितना कुछ छोड़ना पड़ता है, ओ माई गोड!
दौड़ में हारने के बाद खरगोश ने कछुए से पूछा- तू इतना छोटा है, धीमे चलता है, फिर कैसे जीत गया-? कछुए ने मुस्कुराते हुए कहा – बिना रूके, थके मैं लगातार चलता रहा, इसलिए सफल हो गया। हम भी उत्कृष्ट सिंह निष्क्रीडित व्रत की 09 साल से लगातार अभ्यास कर रहे थे। पहले 08, फिर 16, 32, 35, 48, 66, 80, 186 व्रत उपवास किये और 2017 से एकान्तर व्रत लगातार चल रहे हैं। पुष्पगिरी तीर्थ से मम् आराध्य आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी गुरुदेव का वात्सल्यमयी आशीष लेकर, सिद्धवर कूट में विराजमान सन्त शिरोमणी आचार्य श्री विद्या सागर जी महाराज के प्रथम बार चरण वन्दना की और 200 दिन के व्रत करने का संकल्प लिया। हमने चिन्तन किया, सिद्धवर कूट, इस युग के महान सिद्ध हस्त सन्त शिरोमणि, और तीर्थराज सम्मेद शिखर की सिद्ध भूमि* पर 200 दिन का नहीं, अब तो 557 दिन वाला महान व्रत ही करना चाहिए। व्रत संकल्प गुरू पाद पूजा, मम् आदर्श तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी गुरूदेव को साक्षी मानकर षटरस त्यागी स्थविराचार्य श्री सम्भव सागर जी गुरूदेव के चरणों में *व्रत संकल्प लिया और 21 जुलाई, 2021 से तप साधना प्रारम्भ की। बड़े व्रत के 16 उपवास का पारणा 03 मई, 2022,, अक्षय तृतीया को होगा।
इन्सान अपने सारे सपने पुरे कर सकता है, बशर्ते संकल्प, मेहनत, और सतत प्रयास अन्तरंगता के साथ करे तो। अन्यथा ज़िन्दगी भर चले और पहुंचे मरघट। इसलिए — सफलता के लिये संकल्प, मेहनत और सतत प्रयास बहुत ज़रूरी है। उक्त जानकारी राज कुमार जैन अजमेरा,मनीष जैन कोडरमा,बंटी जैन हमदाबाद,विवेक जैन कोलकोत्ता ने दी।