आवश्यक खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी नहीं लगाने जाने की मागं की गई
रतलाम । आज दी ग्रेन एण्ड सीड्स मर्चेन्टस एसो. रतलाम, म.प्र. अनाज दलहन तिलहन व्यापारी महासंघ सहित आदि पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने संयुक्त रूप प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला जी सीतारमण वित्त मंत्री भारत सरकार के नाम एक ज्ञापन जिला कलेक्टर श्री नरेन्द्र सूर्यवंशी को ज्ञापन सौंपा ।
ज्ञापन के माध्यम से कहा कि भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल और पूरे राष्ट्र की इसके अन्तर्गत शाखाएं, इसके अधिकतम सदस्य, भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने वाले है। बीयूवीएम के निर्वत्तमान अध्यक्ष पंडित श्याम बिहारी मिश्रा बराबर यह कहते थे कि मैं भारतीय जनता पार्टी का सांसद हूँ, परन्तु व्यापारी पहले हूं । वे व्यापार एवं उद्योग के हमेशा रक्षक बने रहे । चाहे लोकसभा हो या बीयूवीएम द्वारा आयोजित खुला मंच हो । उन्होंने व्यापारियों की समस्याओ को पुरजोर तरिके से उठाकर उनके समाधान में अग्रणी रहे ।
भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल बराबर मांग करता रहा है कि ब्राण्डेड जो खाद्य वस्तुएं है उनको भी जीएसटी की निल श्रेणी में लाया जाना चाहिए । बीयूवीएम ने कभी राष्ट्रीय स्तर की कम्पनियों के ब्राण्ड की वकालत नहीं की । परन्तु जो छोटे-छोटे व्यापारी, छोटे-छोटे उद्योग अपने गांव-कस्बे में अपनी वस्तुओं पर ब्राण्ड लगाकर विक्रय करते है । उनको जीएसटी की नील श्रेणी में लाने के लिए निवेदन करते रहे है ।
प्रधानमंत्री जी आप स्वंय ने तथा पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कई बार दोहराया है कि आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी नहीं लगाया जावेगा । जीएसटी काउंसिल नेएफएफएसएआई एक्ट का हवाला देकर यानी लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के अनुसार सभी खाद्य वस्तुएं पैकिंग होकर और प्रोपर लेबल लगाकर ही बिकेगी। चाहे वह मण्डी में बिकने वाला गेंहू, धान, दलहन, तिलहन, मसाले एवं कोई भी सामान हो । तिलहन एवं मसाले पहले ही जीएसटी की 5 प्रतिशत के दायरे में आए हुए है तथा चावल, मील का चावल पैक और लेबल लगाकर बिकेगा । इसी तरह आटा मिल का आटा, दाल मिल की दाल पैक एवं लेबल लगाकर बिकेगा और उन पर जीएसटी 18 जुलाई से लगा दिया जाएगा।
करीब 80 करोड़ लोगों को भारत सरकार खाद्य वस्तुएं उपलब्ध कराकर उनकी समस्या दूर करती है । परन्तु भारत का 55 करोड़ मध्यमवर्गीय उपभोक्ता जिसमें छोटे-छोटे ट्रेड व उद्योग भी शामिल है । स्वरोजगार के माध्यम से ही अपने सूक्ष्य आय के स्त्रोंत के अनुसार खाद्य वस्तुओं की व्यवस्था करता है । खाद्य वस्तुओं पर जीएसटी लगाना इनके हितों पर कुठाराघात होगा ।
आज भारत में सरकारी नीतियों के कारण ऑनलाईन व्यापार तेजी से बढ़ रहे है । इनमें भी एमएनसीज का बहुत बड़ा हाथ है जो अपना व्यापार जमाने के लिए घाटे का बजट बनाती है । उपभोक्ता को डिस्काउन्ट का लालच देती है और जो व्यापारी है वह अपना व्यापार खोता जा रहा है लाखों व्यापारी बेरोजगार हो चुके है । गेंहू, आटा, दाल चावल आदि आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी नहीं लगने दे । जीएसटी काउंसिल को आपका निर्देशित वांछनीय है । आशा है कि आप उन छोटे-छोटे व्यापारी, छोटे-छोटे उद्योगों का आग्रह सुनेंगे और महंगाई की मार झेल रहे उस मध्यमवर्गीय उपभोक्ता को जीएसटी का और भार नहीं आए व्यवस्था करेंगे । व्यापारीगणों द्वारा दिं. 28-29 जून की 47 वीं जीएसटी काउंसिल की मीटिंग में भारत सरकार को आवश्यक वस्तुओं पर पैकेजिंग एवं लेबलिंग के नाम पर लगाए जाने वाले कर (जीएसटी) की अनुशंसा को निरस्त करने का आग्रह किया है ।
ज्ञापन देते समय दी ग्रेन एण्ड सीड्स मर्चेन्टस एसो. अध्यक्ष सुरेन्द्र चत्तर , अनाज दलहन तिलहन व्यापारी महासंघ जिलाध्यक्ष दिलीप मेहता,मण्डी व्यापारी प्रतिनिधि मनोज जैन,अभय सेठिया,वर्धमान बरडीया,कान्तिलाल चोपडा, धर्मेन्द्र माहेश्वरी, सैय्यद मुख्तार अली, दीपक खेडावाला, हितेश बाफना, पंकज चौपड़ा, अर्पित सीयार, कैलाश ओरा, संजय जैन, हितेश मेहता, सैय्यद अजगर अली, संचय वोरा, वीरेन्द्रसिंह राठौर आदि उपस्थित थे ।