सम्मेद शिखर जी । दिगम्बर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी और जैन श्वेताम्बर सोसायटी के अध्यक्ष एवं पदाधिकारियों की उपस्थिति में सभी आवश्यक निर्णय अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर मुनिराज के सान्निध्य में लिए गए । एक संगोष्ठी में बसंत भाई दोशी मुम्बई ने समाचार दिया है कि सम्मेद शिखरजी की भगवान पार्श्वनाथ की टौंक पर आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज के सानिध्य में दिगम्बर एवं श्वेताम्बर पंथ के प्रतिनिधि एकत्रित हुए और सम्मेद शिखरजी पर चल रहा आपसी विवाद समाप्त कर क्षेत्र पर विकास कार्य मिलकर करेंगे ऐसा निर्णय किया गया । करीब सौ साल से चल रहा विवाद समाप्त हुआ । समग्र जैन समाज के लिए यह सबसे बड़ी उपलब्धि है ।
जैन समाज को गुरु पूर्णिमा पर विशेष उपहार
साधना महोदधि ,उभय मासोपवासी अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर मुनिराज ने गुरु पूर्णिमा पर सम्पूर्ण जैन समाज को विशेष उपहार दिया । साधना महोदधी अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज जो की सिंहनीस्किड़त व्रत की 557 दिन की अखण्ड मोन व्रत साधना में शिखर की स्वर्ण भद्र टोंक पर साधना रत है । गुरु पूर्णिमा के पवित्र , पावन प्रसंग पर अंतर्मना गुरुदेव के आशीर्वाद व सान्निध्य में जैन समाज के सबसे महानतीर्थ शास्वत तीर्थ शिखर जी के संरक्षण व विकास के लये दिगम्बर और श्वेताम्बर जैन समाज के मध्य हुआ ऐतिहासिक समझौता अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर जी महाराज के आशीर्वाद व प्रेरणा से दोनों ही कमिटीयों ने अपने सभी वैधानिक विवादों को वापस लेने पर सहमति प्रदान कर भविष्य में प्रेम मैत्री , सदभाव , समन्वय के साथ तीर्थ के संरक्षण व विकास के लिए कदम से कदम मिलाकर साथ कार्य करने का संकल्प लिया । उक्त जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार अजमेरा ने दी ।