राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश ने मुनि श्री 108 श्रीधर्म भूषण जी मुनि श्री 108 श्री सुख सागर जी और माता जी का श्वेतांबर समाज की ओर से अभिनंदन किया

मंदसौर जैन दिवाकर प्रवचन हॉल जीवा गंज 16 जुलाई 2022 । भगवान महावीर की दिगंबर और श्वेतांबर दोनों परंपरा का दशपुर मंदसौर की पावन धरती पर सौहार्दपूर्ण माहौल में ऐतिहासिक मिलन ने देश में आदर्श प्रस्तुत किया।
दिगंबर परंपरा के गुरुदेव धर्म भूषण जी और श्वेतांबर स्थानकवासी जैन परंपरा के राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश दोनों गुरु आपस में आध्यात्मिक चर्चा के साथ-साथ जैन धर्म के सभी परंपराओं को समन्वय स्थापित करके एकता की मिसाल प्रस्तुत करनी चाहिए अपनी परंपरा का पालन करके अन्य परंपरा का सम्मान करें भगवान महावीर एक थे और हम भी एक हैं का संदेश दिया और मुनि कमलेश ने प्रस्ताव रखते हुए कहा कि श्वेतांबर के 8 दिन पर्यूषण पर्व और दिगंबर के 10 लक्षण पर्व दोनों परंपरा 18 दिन मनाएं बाद में आने वाली रविवार को सकल जैन समाज विश्व मैत्री दिवस क्षमावाणी के रूप में मनाए के रूप में मनाया जाए।
राष्ट्रसंत ने मुनि श्री 108 श्रीधर्म भूषण जी मुनि श्री 108 श्री सुख सागर जी और माता जी का श्वेतांबर समाज से अभिनंदन किया और यहां पधारने की विनंती की।
धर्म भूषण जी ने मुनि कमलेश के द्वारा भगवान महावीर की साधना स्थली राजगृही में चौथे पहाड़ सुवर्णागिरी की यात्रा वापस बिहार सरकार की ओर सेप्रारंभ करने के लिए किए गए प्रयासों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की अहिंसा और गौ रक्षा के कामों का अनुमोदन किया।
दोनों गुरु भगवंत ने औरसंस्कृति की रक्षा व्यसन मुक्ति पर्यावरण अहिंसा और विश्व शांति के लिए संगठित होकर प्रयास करने का आह्वान किया।
श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ जीवा गंज के महामंत्री विजय खटोड़ अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली युवा शाखा के राष्ट्रीय संयोजक अजीत अजीत खटोड़ संजय पोरवाल सुभाष भंडारी नितिन पामेचा नितेश भटेवरा आशा बहन राजकोट एवं दिगंबर जैन समाज के अध्यक्ष दीपक भूता महामंत्री मनोज गांधी ने संयुक्त बयान में कहा कि चारों महीने समय-समय पर विचारों का आदान प्रदान किया जाएगा।
इसके पूर्व मूर्तिपूजक आचार्य यशो भद्र सागर सुरीश्वर जीआचार्य पीयूष भद्र सागर सुरीश्वर जी एवं राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश के बीच जैन समाज में एकता के लिए चर्चाएं हुई उन्होंने भी सभी कार्यक्रमों में उदारता पूर्वक सहयोग लेने और देने की भावना व्यक्त की।

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