रतलाम । भरत चक्रवर्ती के राजभवन में तीनों मुख्य दूत एक साथ आए। पहला दूत जो की भगवान आदिनाथ के समचार लाने के लिए नियुक्त था उसने सन्देश दिया की भगवान आदिनाथ हमारी अयोध्या नगरी में पधारे है। दूसरा दूत जो पारिवारिक समाचार लाने के लिये नियुक्त था उसने समाचार दिया की आपको पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है ।
तीसरा दूत तो भरत के चक्रवर्ती बनने की तैयारियों की सूचना देने के लिए नियुक्त था उसने समाचार दिया की आयुध शाला में जो चक्र 1000 वर्षों से तैयार किया जा रहा था वो तैयार हो गया है, उस चक्र का तेज सूर्य से भी तेज है आप चक्रवर्ती बन गए है।
इस प्रकार तीनों दूत तीन विभिन्न प्रकार की खुश खबरी लेकर आए। आपके सामने ऐसी स्थिति आ जाए की आपके नगर में साधु भगवन पधारे है, आपको पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है और आप बहुत ही प्रतिष्ठित चुनाव जीत गए है तो आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण समाचार क्या होगा सबसे पहले आप कौन सी खुशी को सेलिब्रेट करेंगे। भरत चक्रवर्ती कहते है की पुत्र के जन्म का महोत्सव बाद में मना लेंगे, चक्रवर्ती का महोत्सव की बाद में मना लेंगे लेकिन सबसे पहले मुझे भगवान आदिनाथ के दर्शन करना है। आप मन में विचार करना आप ऐसी परिस्थिति में क्या निर्णय लेते ।
भरत मरुदेवी माता को यह शुभ समाचार देने के लिये उनके महल की और जाता है, रास्ते में मरीची मिलता है उसे भी साथ में लेता है दोनों माँ मरुदेवी के पास जाते है और भरत माँ से कहता है जिसका तू 1000 वर्ष से इंतजार कर रही थी वो तेरा आदिनाथ अयोध्या में आ गया है, माँ की आँखों से खुशी के आँसू बहने लगते है। कहती है आदिनाथ महल में क्यों नही आया मुझे आदिनाथ के पास चलना है। अब आगे कैसे आदिनाथ के पास जाएंगे मरुदेवी माता का क्या होगा मरीची का क्या होगा यह आगे सुनने पर पता चलेगा।