


महाड़। परोपकार सम्राट आचार्य देव श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी महाराजा साहेब के सुशिष्य परम पूज्य प्रवचनदक्ष मालवरत्न मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी महाराजा साहेब एवं मुनि मंगलचंद्र विजयजी की पावन निश्रा में पर्वाधिराज श्री पर्युषण महापर्व धूमधाम से चल रहे हैं। तपस्या की लड़ी लगी हुई है । अनेकों आराधक तेला 8,11,16 आदि की तपस्या में आगे बढ़ रहे हैं। प्रथम 3 दिन अष्टान्हिका व्याख्यान का सुंदर ओजस्वी वाणी में सारगर्भित प्रवचन मुनिराज श्री ने प्रदान किया । जिसका लाइव प्रसारण आर वी ग्रुप इंडिया यूट्यूब चैनल पर भी किया गया। मुनिश्री ने पर्व के पांच कर्तव्य,दैनिक कर्तव्य एवं 11 वार्षिक कर्तव्य पर विशेष प्रकाश डाला। मुनिश्री ने जीवदया स्वरूप पशुओं को कैसे छुड़ाना इस पर अपना चिंतन दिया । साधार्मिक भक्ति कैसे व किस तरह से करना चाहिए इस विषयक अपने विचार रखे । मुनिश्री की सरल भाषा दमदार शैली और 26 वर्ष के संयम जीवन का अनुभव लोगों को देखने मिल रहा है। मुनिश्री के आगमन के साथ ही धर्मधरा बने महाड़ नगर के इतिहास में सर्वप्रथम सफल शासन प्रभावना से युक्त यशस्वी चातुर्मास चल रहा है। स्थानकवासी तेरापंथी और मंदिर की परंपरा के तीनों संघ संयुक्त होकर के एकता के रूप में चातुर्मास करा रहे हैं। महाड़ संघ व गुरु समर्पण चातुर्मास समिति साधर्मिक भक्ति और मेहमान नवाजी में कोई कमी नहीं आने दे रहे हैं। मालवा गुजरात एवं कोंकण क्षेत्र महाराष्ट्र के श्रीसंघ एवं गुरुभक्त विशेष रूप से लाभ ले रहे हैं।
महापर्व में इन्हें मिला विशेष लाभ वरघोड़ा निकालकर कल्पसूत्र व्होराने का एवं महावीर जन्म वांचन के पश्चात स्वामीवात्सल्य का लाभ हीराचंदजी देवीचंदजी ओसवाल सियाणा महाड को मिला।
पाक्षिक तपस्वी बहुमान का लाभ
महावीरजी पवनजी शंकरलालजी देसरला परिवार को मिला । महापर्व के दौरान प्रतिदिन भक्ति भावना हो रही है। सूरत के हेनिल जैन, दहानु के लिटिल स्टार महेश एवं एमपी के विक्रम भाई ने भक्ति की धूम मचाई।प्रवीणजी कटारिया परिवार की ओर से श्री राजेंद्र सुरीजी की अष्टप्रकारी पूजा व श्री संघ की ओर से अंतराय कर्म की पूजा का आयोजन किया गया। एकम के दिन भगवान महावीर का जन्म वांचन आयोजन प्रातः 09:00 बजे से किया जाएगा।