


महाड। परोपकार सम्राट प.पू.आचार्यदेव श्रीमद्विजयजी ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा.के सुशिष्य प.पू.प्रवचनदक्ष मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा. एवं मंगलचन्द्र विजयजी मसा.की पावन निश्रा में श्री नवकार महामंत्र की 9 दिवसीय एकासना तप-जप क्रिया विधि सह सुन्दर तपाराधना चल रही है। आराधना का सम्पूर्ण लाभ श्रीमती टीनाबेन प्रवीणजी कोठारी परिवार को मिला है। धर्मसभा में मुनिवर ने बताया नवकार मंत्र सदा सर्वदा शास्वत है। इस मंत्र की आराधना द्वारा अनंत अरिहंत,सिद्ध,आचार्य,उपाध्याय व साधु की आराधना हो जाती है। इस मंत्र को एकाग्रता पूर्वक श्रद्धा भाव से सव्वा लाख जाप करने वाला दुर्गति में नहीं जाता है,इसलिए इसका ध्यान कर आत्मिक साधना करनी चाहिये ।मुनिप्रवर ने कहा नवकार में शक्ति, भक्ति व मुक्ति का त्रिवेणी सामागम है। महामंत्र के 68 अक्षर- 68 तीर्थ स्वरूप है। शास्त्रों में एक-एक अक्षर में 108 विशिष्ट प्रकार की औषधि,लब्धि तथा चौदपूर्व का सार भी नवकार को माना गया है। सामान्यतः पर्यूषण पर्व के बाद तप आराधना एवं प्रवचन में संख्या कम हो जाती है किंतु पर्व के बाद भी यहां पर आराधक भाई बहन नित्य जाप विधि क्रिया तप करके जीवन के अमुल्य क्षण को कल्याण की राह पर लगा रहे हैं । प्रतिदिन नवकार महामंत्र की एवं गौतम स्वामीजी की आरती होती है, एवं मुनिश्री के द्वारा बने हुए सुंदर नवकार के भावपूर्ण स्तवनों की भक्ति होती है। आराधना प्रारंभ के पूर्व नूतन बनकर आये चांदी के मनोहारी पट्ट की स्थापना लाभार्थी परिवार ने की,आराधक व श्रीसंघ के महानुभाव सहयोगी बने। प्रतिदिन अलग-अलग श्रीसंघो का आगमन हो रहा है। चातुर्मास समिति महाड़ एवं श्रीसंघ सभी की स्वामीभक्ति का सुंदर लावा ले रहा है। 8 सितंबर को 16 उपवास के तपस्वी निशा बेन राजेशजी कटारिया की तप अनुमोदना में आयोजन होगा। 10 सितंबर को महामंगलकारी चमत्कारी महामांगलिक होगी,जिसका लाभ अरविंदजी कावेड़िया इंदापुर को मिला है।