पिपलोदा नई आबादी 11 दिसंबर 2022 । मानव-मानव के बीच जाती प्रांत भाषा नस्लभेद के आधार पर भेदभाव करने वाला साक्षात परमात्मा का अपमान कर रहा है । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने मानव अधिकार दिवस पर संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिष्ठा और विभव के आधार पर उसका मूल्यांकन करना गौर अज्ञानता है।
उन्होंने कहा कि जब धरती पर जन्म लेता है तब उसके सिर पर कोई धर्म और जाति का निशान नहीं होता है मानव बन कर जन्म लेता है मानव बनकर रहना चाहिए और मानव ही दुनिया से विदाई लेना चाहिए।
राष्ट्रसंत ने कहा कि छोटी-छोटी घटनाओं पर मानवाधिकार मगरमच्छ के आंसू बहाता है। लेकिन आतंकवाद के नाम पर नरसंहार हो रहा है वहां उसकी जबान को लकवा क्यों मार जाता है। जैन संत ने कहा कि मानवीय रिश्तो में मधुरता बोलना मानवीय गुणों का जीवन में विकास करना सभी धर्मों का मुख्य लक्ष्य है धार्मिक क्रिया इनको पूर्ण करता है तभी सार्थकता है 12 दिसंबर को सैलाना पधारने का है।