दूल्हे और संत के वेश परिधान में कितना अंतर होता है उतना ही धर्म स्थल और पर्यटन स्थल में अंतर होना चाहिए- राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश

  • राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश का हुआ सैलाना आगमन
  • राष्ट्रसंत के 15 दिसंबर को रतलाम पधारने की संभावना

सैलाना 12 दिसंबर 2022 । महापुरुषों के त्याग और साधना के पवित्र स्थल को पर्यटन के रूप में परिवर्तन करना धर्म और सिद्धांतों को पैरों तले कुचलने के समान है । उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने धर्म सभा को संबोधित करते कहा कि दूल्हे और संत के वेश परिधान में कितना अंतर होता है उतना ही धर्म स्थल और पर्यटन स्थल में अंतर होना चाहिए । उन्होंने कहा कि धर्मस्थल को आमोद प्रमोद और विलासिता के रूप में प्रस्तुत करना अक्षम्य अपराध है जो काम गुलामी राज्य में नहीं हुआ वह लोकतंत्र की दुहाई देने वाली सरकार कर रही है । यह आध्यात्मिक संस्कृति को नष्ट करने का षड्यंत्र है।
मुनि कमलेश ने पवित्र सम्मेद शिखर सहित देश के सभी धर्म स्थानों को सरकारी पवित्र स्थल घोषित किया है वहां पर शराब मांसाहार सहित सभी को व्यसनों पर तत्काल प्रतिबंध लगाना चाहिए । अथवा पवित्र शब्द को तत्काल बर्खास्त करें । राष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि पवित्र स्थलों के संदेश के माध्यम से ही भौतिकवाद की चकाचौंध में भी हम जैसे संतों का निर्माण हो रहा है यह किसी चमत्कार से कम नहीं है । जैन संत ने केंद्र और राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी देते कहा कि 1 जनवरी तक सम्मेद शिखर जी को पर्यटन स्थल की घोषणा को वापस नहीं लिया तो भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली सहित संस्थाएं मिलकर देशव्यापी अहिंसक आंदोलन खड़ा करने का प्रस्ताव पास किया सैलाना पधारने पर लोटस स्कूल में प्रवचन कार्यक्रम हुआ विद्यार्थियों ने नशा मुक्त पर्यावरण रक्षा और देशभक्ति का संकल्प लिया। पुलिस प्रशासन की सेवाएं प्रशंसनीय रही 13 और 14 दिसंबर को प्रवचन के पश्चात 15 दिसंबर को अलकापुरी रतलाम पधारने की संभावना है ।