रतलाम (मृदुल धाम 19 दिसंबर 2022) । विश्व में धर्म और आध्यात्मिकता ढोल पीटने वालों में नैतिकता के दर्शन दुर्लभ होते जा रहे हैं । उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने संबोधित करते कहा कि जीवन में बिना नैतिकता को अपनाएं धार्मिकता की दुहाई देना धर्म आत्मा और परमात्मा के साथ सरासर धोखा है ।
उन्होंने कहा कि नैतिकता के अभाव में कितनी कठोर साधना कर ले धार्मिकता के दरवाजे में प्रवेश नहीं कर सकता । मुनि कमलेश ने कहा कि विश्व सभी धर्मों उपासना पद्धति की भिन्नता होने के बावजूद धर्म नैतिकता की नींव पर ही धर्म मंजिल खड़ी की जा सकती है । संदेश दिया है नैतिकता के अभाव में साधना करना मुर्दे को श्रृंगार कराने के समान है ।
राष्ट्रसंत दुख के साथ कहा की इतने धर्म लाखों की संख्या में संत मौजूद होने के बावजूद भी कदम-कदम पर भ्रष्टाचार, मिलावट, अनीति, हिंसा, धोखाधड़ी, अराजकता, बलात्कार, आतंकवाद का नंगा नाच होना आध्यात्मिकता की दुहाई देने वाले के मुंह पर करारा तमाचा है ।
जैन संत ने स्पष्ट कहा कि सभी धर्माचार्य मिलकर न्यूनतम आचार संहिता धर्म के तैयार करें । जिसमें उनका उपासक नैतिक हो, देशभक्त हो, नशा मुक्त हो, पर्यावरण प्रेमी और सद्भाव मैं विश्वास रखता हों । उसी को उपासना करने का अधिकार दिया जाए ।
उक्त जानकारी अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच युवा शाखा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी निलेश बाफना ने कहा कि महावीर भवन इंदौर चातुर्मास समिति संयोजक श्री प्रकाश जी भटेवरा, जैन कॉन्फ्रेंस पूर्व कार्यवाहक राष्ट्रीय महामंत्री श्री जिनेश्वर जी जैन, अखिल भारतीय श्वेतांबर सोशल ग्रुप के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष पीयूष जैन, पूर्व राष्ट्रीय महासचिव नरेंद्र भंडारी, मनोज जैन सीए प्रतिनिधिमंडल इंदौर से मुनि कमलेश के सेवा में उपस्थित हुए । 2023 के इंदौर वर्षावास को लेकर चातुर्मास संबंधी चर्चा की गई।