फर्जी एवं कूटरचित अंकसूची से नोकरी पाने वाले आरोपी को 03-03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं अर्थदण्ड

आलोट । न्यायालय श्रीमान सुनील कुमार अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आलोट जिला रतलाम के द्वारा अपने निर्णय दिनांक 16.12.2022 को गौरव पिता उमाशंकर साहू, आयु 24 वर्ष निवासी-ग्राम- करैरा, जिला शिवपुरी को धारा 420 व 471/468 के अंतर्गत 03-03 वर्ष के सश्रम कारावास और 2500-2500/- के अर्थदण्ड से दंडित किया गया।
अपर लोक अभियोजक आलोट हेमेन्द्र कुमार गोयल ने बताया कि सूचनाकर्ता फरियादी सुनील मावस्कर, कार्यपालन यंत्री म0प्र0म0क्षे0वि0वि0क0लि0 आलोट ने दिनांक 30.12.2014 को पुलिस थाना आलोट पर एक लेखी शिकायत आवेदन पत्र प्रस्तुत किया, जिसके अनुसार म0प्र0 पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड जबलपुर द्वारा प्रदेश की विद्युत कम्पनियों के लिये परिचारक (संविदा) के पद पर चयन एवं नियुक्ति के लिये विज्ञापन के माध्यम से ऑनलाईन आवेदन पत्र आमंत्रित किये गये थे, जिसमें प्रमुख वांछित शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता यह थी कि प्राप्त म0प्र0 स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था से विद्युत/लाईनमेन या वायरमेन ट्रेड में आईटीआई प्रमाण पत्र (दो वर्षीय) परीक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए एवं नियुक्ति की शर्तो के अनुसार यदि यह पाया जाता है कि उम्मीदवार द्वारा आईटीआई की सर्टिफिकेट परीक्षा म0प्र. राज्य या केन्द्र शासन से मान्यता प्राप्त औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान से उत्तीर्ण नहीं है तो उसकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से निरस्त मानी जावेगी। उक्त विज्ञापन के परिप्रेक्ष्य में आरोपी गौरव द्वारा भी दिनांक 13.02.2014 को ऑनलाईन आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसमें उसने स्वयं की तकनीकी योग्यता विद्युतकार ट्रेड मंे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था ग्वालियर से वर्ष 2004 में उत्तीर्ण होना उल्लेखित किया एवं दस्तावेजो के प्रथम दृष्टया जांचोपरान्त गौरव साहू की नियुक्ति लाईन परिचारक (संविदा) के पद पर मुख्य अभियंता (उक्षे) के आदेश अनुसार दिनांक 17.02.2014 के माध्यम से की गयी थी। गौरव साहू को म.प्र.प.क्षे.वि.वि.क.लि. के संचालन एवं संधारण संभाग आलोट के अन्तर्गत विक्रमगढ वितरण केन्द्र पर पदस्थ किया गया था नियुक्ति के समय गौरव साहू द्वारा आईटीआई परीक्षा विद्युतकार ट्रेड मंे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था ग्वालियर से वर्ष जुलाई 2012 में रोल नं. 1007584 से उत्तीर्ण होने की अंकसूची प्रस्तुत की गई। गौरव साहू द्वारा प्रस्तुत अंकसूची सत्यापन हेतु मुख्य अभियंता कार्यालय उज्जैन द्वारा संबधित आईटीआई को प्रेषित की गयी, तदोरान्त आईटीआई संस्था द्वारा अंकसूची के सत्यापन में यह पाया गया कि गौरव साहू द्वारा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था ग्वालियर से प्रशिक्षण प्राप्त करने एवं परीक्षा उत्तीर्ण करने का कोेई रिकार्ड नहीं है एवं उनके द्वारा अर्हकारी योग्यता के रूप में प्रस्तुत अंकसूची कूटरचित (फर्जी) है। लाईन परिचारक (संविदा) के पद पर नियुक्त प्राप्त करने के लिये गौरव साहू द्वारा फर्जी अंकसूची प्रस्तुत कर कम्पनी को धोखा देने का आपराधिक कृत्य किया गया एवं कूटरचित दस्तावेज के जरिये लाईन परिचारक (संविदा) के पद पर नियुक्ति प्राप्त की गई है, ऐसी नियुक्ति प्रारंभ से ही शून्यवत है। फरियादी की उक्त लेखी शिकायत आवेदन क्रमांक 57/15 धारा 420 एवं 471 का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना उपरांत धारा 467 व 468 भा.द.वि. का ईजाफा किया गया तथा आवश्यक अनुसंधान उपरांत अभियोग पत्र माननीय न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। माननीय विचारण न्यायालय श्रीमान सुनील कुमार अतिरिक्त सत्र न्यायाधिश आलोट जिला रतलाम द्वारा पारित निर्णय दिनांक 16.12.2022 केा अभियेाजन कि और से प्रस्तुत दस्तावेजो तथा साक्ष्य को प्रमाणित मानते हुए आरोपी गौरव साहू केा धारा 420 व 471/468 भा.द.वि. में दोष सिद्ध किया गया। प्रकरण में शासन कि और से सफल पैरवी अपर लोक अभियोजक हेमेन्द्र कुमार गोयल द्वारा की गई।