रतलाम। वैज्ञानिक सत्य सार्वजनिक होता है, धर्म का सत्य व्यक्तिगत ता है, एक वैज्ञानिक की खोज सबके काम आती है। महावीर स्वामी का केवलज्ञान, गौतम स्वामी का केवलज्ञान नही बन सकता है, सबको अपनी अपनी साधना करनी होगी।
महाभारत में कृष्ण ने अर्जुन को ये नही कहा की तू आराम से बैठ में युद्ध लड़ लूँगा। कृष्ण ने कहा लड़ना तो तुझे पड़ेगा, मैं तेरे साथ हुँ। कर्म से युद्ध आपको स्वंय करना पड़ेगा, गुरु केवल मार्ग दिखा सकता है, चलना स्वंय को पड़ेगा। नवकार में इतनी शक्ति होती है की वो आग को भी पानी बना सकती है फिर नवकार आपके कष्ट क्यों नही मिटा पा रहा है, क्योंकि आपके अंदर श्रद्धा नही है।
तप, त्याग तपस्या न भी हो तो प्रभु का आशीर्वाद पाने सबसे आसान रास्ता है, आँख के आँसू। चेहरे की मुस्कान से भगवान मिले न मिले लेकिन आँखों के आँसू से केवलज्ञान जरूर मिल सकता है। गौतम स्वामी ने आँखों के आँसू के आगे अपना केवलज्ञान दाँव पर लगा दिया। गौतम स्वामी भगवान के प्रमुख शिष्य थे, उनके कई शिष्यों को केवलज्ञान हो गया। लेकिन मोह के वशीभूत होने के कारण गौतम स्वामी को केवलज्ञान नही हो पाया।
भगवान महावीर के निर्वाण पर गौतम स्वामी बच्चे की तरह फुट फुट कर रोए, प्रभु अंतिम समय में मुझे अपने आप से दूर क्यों कर दिया, आँसुओं के सैलाब में डूब गए और अगले पहर उन्हें केवलज्ञान हो गया।
आँसू निकाले चन्दनबाला ने और प्रभु को पारणा करवा दिया, और प्रभु ने ऐसी कृपा बरसाई की 36000 साध्वियों की प्रमुख बना दिया।
रोना या तो अपने दोषों को देखकर या दूसरों के दुःख को देखकर। दुसरो का दुःख दूर नही भी कर सकते लेकिन उनके दुःख देखकर आपका मन करुणा से भर जाए आपको आँसू आ जाए तो आपके केवलज्ञान का मार्ग आसान हो जाएगा।
अपने दोषों को देखकर आँसू आ जाना चाहिये की भगवान ने ये शरीर दिया, स्वस्थ इंद्रियां दी, लेकिन उन इंद्रियों का मैं उपयोग कैसे कर रहा हूँ, दुसरो की बुराई देखने में, बुराई करने में मौज शोक करने में, इस तरह के अपने पापों को देखकर आँखों में से अश्रुधारा बह निकले तो भी मोक्ष का मार्ग आसान हो जाएगा।
ये प्रभावशाली प्रवचन पूज्या महासती धैर्यप्रभा जी महासती जी ने नीमचौक की धर्मसभा में फरमाए, पूज्या महासती स्पष्टवक्ता पूज्य गुरुदेव धर्मं मुनि जी मसा की शिष्या है, आप चार ठाणा नीमचौक स्थानक रतलाम पर विराजमान है प्रवचन प्रतिदिन प्रात: 09.15 से 10.15 तक चल रहे है ।