रामगढ। उदगांव अहिंसा संस्कार पदयात्रा के क्रम में झारखंड की राजधानी रांची की ओर पद विहार करते हुवे आज रामगढ की धरती पर भारत गौरव साधना महोदधि सिंहनिष्कड़ित व्रत कर्ता अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज एवं सौम्यमूर्ति उपाध्याय 108 श्री पीयूष सागर जी महाराज ससंघ का भव्य मंगल प्रवेश श्री दिगंबर जैन मंदिर रामगढ में हुवा 3 दिन से आचार्य श्री के साथ चल रहे रामगढ के भक्तों का पुण्य जागा ओर अन्तर्मना का मंगल आगमन हुआ। मंगल आगमन को लेकर पूरे समाज मे एक अलग उत्साह दिखा शहर में कई तोरण द्वार बनाय गए।आचार्य श्री नगर भर्मण कर जैन मंदिर पहुँचे जहाँ सभी को अपने मंगल आशीर्वाद दिया और कहा कि भक्त की भक्ति ने हमे यहाँ खिंच लाया ओर कहा कि भक्ति में बहुत शक्ति होती है वे आगे अपने प्रवचन मव कहा कि कोई कितना भी अपना हो.. पहले अपना देखता है..!
सभी को अपने और अपना पसंद है, पराये कोई भी नहीं। जब पराये भी अपने लगने लगे, तब मानना कि तुम्हारे अन्दर इन्सानियत का जन्म हो गया है। अब तुमसे भगवान ज्यादा दूर नहीं है। यही है विश्व बंधुत्व की भावना, सदभाव प्रेम मैत्री की भावना,देवत्व- शिवत्व की भावना, बुद्धत्व-अपनत्व और मनुष्यत्व की भावना। सभी अपनों के लिये जीते हैं, अपनों के लिये करते हैं, अपनों के लिये मरते हैं, अपनों को याद रखते हैं, लेकिन जीवन का कड़वा सच तो यही है कि तन भी अपना नहीं है, फिर ये सब अपने कैसे हो सकते हैं? मनुष्य जीवन करोड़ो जन्मों की पुण्याई का फल है। चन्द समय के लिए मेहमान बनकर आये हैं, किसकी अर्थी कब उठ जाये, कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए अर्थी उठे • उससे पहले जीवन के अर्थ को जान लेना जीवन की सबसे बड़ी -समझदारी है। चिता जले – उससे पहले चेतना को जगा लेना सबसे बड़ी समझदारी है। अस्तियाँ बिखरे उससे पहले परमात्मा के – प्रति अटूट श्रद्धा, विश्वास पैदा कर लेना ही सबसे बड़ी समझदारी है। अन्यथा अर्थी तो उठेगी — चिता जलेगी- अस्तियाँ बिखरेगी। ये त्रैकालिक सत्य है, जिसे भगवान भी नहीं नकार पाये। समय के मूल्य को समझो और समझदार बन जाओ।
ज़िन्दगी के हर पल को अहोभाव के साथ जियो अन्यथा एक दिन ऐसा आयेगा कि आपके प्रोग्राम में आपकी गैर हाज़िरी होगी। इसलिए दान, पूजा, भक्ति, सेवा, परोपकार, नियम, संकल्प – लेकर इस जीवन को महान बनाओ और परमात्मा से कहो – हे प्रभु! सब तेरा है तेरा तुझको अर्पण करता हूँ। सब मेरे हैं और मैं सबका हु।
इस प्रवेश में रामगढ समाज के सभी पुरुष n महिलायें ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया साथ ही संघपति दिलीप जैन हुम्मड,आकाश जैन इंदौर, दिगम्बर ,बिल्लू जैन ,वंदना जैन गंगवाल धनबाद,साह ,ईशान जैन परिवार धनबाद,मिंटू जैन रामगढ,ईशान जैन कोडरमा आदि शामिल थे।उक्त जानकारी अन्तर्मना कोडरमा मीडिया प्रभारी जैन राज कुमार अजमेरा ने दी।